विनोद सैनी, हिसार/मोहाली। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी विभाग ने अत्याधुनिक चौथी पीढ़ी के रोबोट दा विंची एक्सआई की मदद से कई जटिल यूरोलॉजिकल कैंसर मामलों का सफल इलाज किया है। रोबोटिक सर्जरी को कम रक्तस्राव, कम दर्द, कम निशान और तेजी से रिकवरी के लिए जाना जाता है।

अस्पताल में एक 56 वर्षीय किडनी ट्रांसप्लांट मरीज की ट्रांसप्लांटेड किडनी में 3 सेमी का ट्यूमर पाया गया। जांच के बाद वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. धर्मेंद्र अग्रवाल ने रोबोट-एडेड पार्शियल नेफरेक्टोमी कर ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया और किडनी को सुरक्षित रखा। मरीज को न तो डायलिसिस की जरूरत पड़ी और न ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन की। ऑपरेशन के 10 घंटे बाद ही मरीज चलने लगा और तीसरे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

एक अन्य मामले में मरीज के पूरे मूत्राशय को हटाकर यूरिनरी सिस्टम को छोटी आंत के हिस्से से जोड़ते हुए नया मार्ग बनाया गया। मरीज की पहले से हृदय और किडनी संबंधी समस्याओं के बावजूद सर्जरी सफल रही और वह 10 घंटे के भीतर चलने में सक्षम हो गया तथा पांच दिन में डिस्चार्ज कर दिया गया।

तीसरे जटिल मामले में 62 वर्षीय मरीज की दाहिनी किडनी में 14 सेमी का बड़ा ट्यूमर पाया गया, जो गुर्दे की नस और इन्फीरियर वेना कावा तक फैल चुका था। डॉ. अग्रवाल की टीम ने रोबोटिक रेडिकल नेफ्रेक्टोमी और IVC थ्रोम्बेक्टोमी के जरिए ट्यूमर और थ्रोम्बस को पूरी तरह हटा दिया। यह मामला अत्यंत जोखिमपूर्ण था क्योंकि थ्रोम्बस के हृदय तक पहुंचने का खतरा था, लेकिन सर्जरी सफल रही और मरीज 8 घंटे के भीतर चलने लगा तथा तीन दिन में छुट्टी दे दी गई।

डॉ. धर्मेंद्र अग्रवाल ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं और अस्पताल में रहने का समय भी काफी कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में यह तकनीक अधिक सुरक्षित और सटीक परिणाम देती है, जिसमें 3D विज़न और न्यूनतम इनवेसिव तकनीक का उपयोग किया जाता है।

डॉ. अग्रवाल ने लंदन से जटिल कैंसर सर्जरी और रोबोटिक तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अब तक 700 से अधिक रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक कर चुके हैं।