सुमन चौहान, करनाल। जिले के नीलोखेड़ी में स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) के छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली बात सामने आई है। इस संस्थान ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईआईटी रोपड़ के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू का सीधा मतलब एक ऐसा लिखित सरकारी समझौता होता है, जिसके तहत दो बड़े संस्थान मिलकर छात्रों की पढ़ाई और तरक्की के लिए काम करने का वादा करते हैं। इस नए तालमेल से अब नीलोखेड़ी के छात्रों को देश की सबसे बेहतरीन लैब और वहां के प्रोफेसरों से सीधे सीखने का मौका मिलेगा।

हर साल चुने जाएंगे 30 छात्र, एक साल तक आईआईटी में रहकर करेंगे रिसर्च

इस खास प्रोग्राम के तहत नीलोखेड़ी कॉलेज के फाइनल ईयर यानी आखिरी साल के करीब 30 छात्रों को हर साल आईआईटी रोपड़ जाने का अवसर मिलेगा। कॉलेज की हर ब्रांच से अधिकतम पांच छात्रों को चुना जाएगा, जो अधिकतम एक साल तक आईआईटी कैंपस में रहकर अपनी पढ़ाई और रिसर्च यानी नई तकनीकों पर खोज से जुड़ा काम कर सकेंगे। अच्छी बात यह है कि वहां रहने के दौरान भी वे अपने मूल कॉलेज के छात्र ही माने जाएंगे। इसके साथ ही दोनों कॉलेजों के टीचर्स भी एक-दूसरे के यहां जाकर नई तकनीकों और प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम करेंगे।

हरियाणा सरकार के प्रयासों से मिली बड़ी कामयाबी, युवाओं को मिलेगा सीधा फायदा

इस बड़े समझौते को हकीकत में बदलने में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह का विशेष योगदान रहा है। इसके साथ ही तकनीकी शिक्षा विभाग के महानिदेशक प्रभजोत सिंह और आईआईटी रोपड़ के डायरेक्टर प्रोफेसर राजीव आहूजा की कोशिशों से ही यह राह आसान हो सकी है। नीलोखेड़ी कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रोफेसर अनिल कुमार रोज ने बताया कि यह समझौता अभी शुरुआती पांच वर्षों के लिए किया गया है, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इससे छात्रों को फैक्ट्रियों और कंपनियों की जरूरतों के हिसाब से हुनर सीखने और बहुत अच्छे रोजगार यानी नौकरियां पाने में सीधी मदद मिलेगी। दोनों संस्थान मिलकर रोबोटिक्स, डेटा साइंस और आधुनिक इंजीनियरिंग जैसे नए क्षेत्रों में काम शुरू करेंगे।