France Government Blood Bank Cooling System Hacked: फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हैकर्स ने एक बार फिर पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। हैकर्स ने फ्रांस के सरकारी ब्लड बैंक का कूलिंग सिस्टम हैक कर खून को 110°C तक खौलाने की साजिश की। मलावरों ने फ्रीजर का तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस तक करने की कोशिश की। हालांकि, अलार्म सिस्टम ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली। इससे खून और प्लाज्मा के नमूनों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
फ्रांस के साप्ताहिक अखबार ‘ले कनार आंचेने’ ने बुधवार को सबसे पहले इस साइबर हमले की खबर दी थी। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। ब्लड स्टोरेज सिस्टम में प्रवेश के लिए डिफॉल्ट पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया था।
फ्रांस के ब्लड बैंक का संचालन करने वाली संस्था फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट (EFS) के मुताबिक फ्रीजर में रखे प्लाज्मा को सुरक्षित दूसरी जगह भेज दिया गया है। EFS ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में लगे निगरानी और अलार्म सिस्टम ने तापमान में असामान्य बदलाव को तुरंत पकड़ लिया। इससे कर्मचारियों को समय रहते कार्रवाई करने का मौका मिल गया। EFS फ्रांस की सरकारी रक्त सेवा है। यह देश के 1,900 से ज्यादा अस्पतालों के लिए खून, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स इकट्ठा करने, उनकी जांच करने, उन्हें तैयार करने और अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करती है।
इंटरनेट से जुड़े फ्रीजर कंट्रोल सिस्टम में सेंध लगाई
बता दें कि इससे पहले फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हैकरों ने सुपर मार्केट में रखे रेफ्रिजरेटर को हैक कर लिया था। हैकरों ने रेफ्रिजरेशन के तापमान को बढ़ा दिया। फ्रांस की सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-FR ने 12 अक्टूबर को ही रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर पर हमलों को लेकर चेतावनी जारी की थी। एजेंसी के मुताबिक, इन उपकरणों के कई कंट्रोलर इंटरनेट पर सीधे उपलब्ध थे। इनमें डिफॉल्ट पासवर्ड जैसी सुरक्षा संबंधी कमजोरियां थीं। डिफॉल्ट पासवर्ड (पहले से तय पासवर्ड) वह पासवर्ड होता है, जो किसी मशीन, डिवाइस या सॉफ्टवेयर में कंपनी की तरफ से पहले से सेट करके दिया जाता है। अगर मशीन लगाने के बाद उसका पासवर्ड नहीं बदला गया, तो हैकर उसी पुराने पासवर्ड से सिस्टम में घुसने की कोशिश कर सकते हैं।
रूस पर हमले का शक
यूरोप में हुए इन साइबर हमलों के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हुआ है। हालांकि, रूस समर्थित हैकर समूहों की भूमिका को लेकर शक जताया जा रहा है।आयरलैंड की न्यूज वेबसाइट RTE की 5 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस समर्थक दो हैकर समूहों नोनेम057(16) और जेड-पेंटेस्ट अलायंस ने डैनफॉस कंपनी की तकनीक को हैक करने का दावा किया था।
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