दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। झारखंड के देवघर जिले के बीहड़ जंगल, एक ऐसा गांव जहां का बच्चा-बच्चा ठगों का मददगार है, और एक शातिर गिरोह जो स्क्रीन के पीछे बैठकर आपकी गाढ़ी कमाई पर नजर गड़ाए था। लेकिन इस बार उनका पाला नर्मदापुरम पुलिस के जांबाज जासूसों से पड़ा था। पुलिस ने न सिर्फ झारखंड के ‘जामताड़ा’ जैसे गढ़ में सेंध लगाई, बल्कि एक पिता और उसके दो बेटों को बेड़ियों में जकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। ​

ठगी का यह खेल तब शुरू हुआ जब सदर बाजार निवासी निजाम उल हक के व्हाट्सएप पर आरटीओ चालान के नाम पर एक APK फाइल आई। फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल का रिमोट एक्सेस ठगों के पास चला गया और पलक झपकते ही खाते से 95 हजार रुपए साफ हो गए। पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस थोटा ने इसे चुनौती के रूप में लिया और एक स्पेशल टीम को मिशन ‘देवघर’ पर रवाना किया।

नर्मदापुरम पुलिस के एसआई जितेंद्र चौहान को आरोपियों के गांव धुंधूवाजोरी में घुसना शेर की मांद में हाथ डालने जैसा था। पूरा गांव ठगों का कवच बना हुआ था। पुलिस ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए फिल्मी स्टाइल अपनाया गाड़ियों की एमपी (MP) नंबर प्लेट पर कागज चिपकाकर टेप लगा दी, ताकि गांव वालों को भनक न लगे कि मध्य प्रदेश पुलिस गांव में डेरा डाले हुए है। सात दिनों तक पुलिस की टीम वहां साये की तरह डटी रही।​

आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने जंगल के बीच से मास्टरमाइंड अरुण मेहरा और उसके बेटे ललन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि गिरोह का सरगना महज 8वीं फेल है ओर उसने यह पूरा काम जेल के अंदर रहकर ही सीखा था, लेकिन तकनीक के जरिए लोगों को लूटने में वह माहिर था। टीम की इस बहादुरी के लिए 10 हजार रुपए के इनाम एसपी ने घोषणा की है। ​पुलिस ने साफ कर दिया है की अपराधी चाहे पाताल में छिपे या झारखंड के जंगलों में, नर्मदापुरम पुलिस का हाथ उनकी गिरेबान तक पहुंच कर ही रहेगा।

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