Business Desk – Fuel Export Duty Cut : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाला शुल्क घटा दिया है। नई दरें लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों को यह राहत फिलहाल दो सप्ताह के लिए दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1 रुपए प्रति लीटर, डीजल पर 5 रुपए और ATF पर 4 रुपए प्रति लीटर घटाई गई है। घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अब पेट्रोल-डीजल और ATF पर कितना एक्सपोर्ट ड्यूटी
पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1.5 रुपए से घटाकर 0.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। डीजल पर शुल्क 25 रुपए से घटकर 20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं, ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 19 रुपए से घटाकर 15 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।
इसके अलावा डीजल के निर्यात पर लगने वाला 1 रुपए प्रति लीटर का RIC भी हटा दिया गया है। सरकार ने इससे पहले 1 सितंबर से डीजल एक्सपोर्ट पर सेस को शून्य से बढ़ाकर 1 रुपए प्रति लीटर किया था।
घरेलू बाजार में एक्साइज ड्यूटी नहीं बदली
एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का मतलब घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सीधे कमी होना नहीं है। सरकार ने घरेलू खपत के लिए लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया है।
सरकार ने पश्चिम एशिया में तनाव के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 27 मार्च 2026 से कुछ निर्यात प्रतिबंध लागू किए थे। अब निर्यात शुल्क में अस्थायी कटौती के जरिए तेल कंपनियों को राहत दी गई है।
भारत तेल आयात करता है, फिर निर्यात क्यों?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। देश में आयातित कच्चे तेल को रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।
इन पेट्रोलियम उत्पादों का एक हिस्सा घरेलू बाजार में इस्तेमाल होता है, जबकि बचा हुआ हिस्सा विदेशों में निर्यात किया जाता है। भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े निर्यातकों में शामिल है।
तेल कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?
एक्सपोर्ट ड्यूटी घटने का सीधा फायदा उन तेल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेगा जो पेट्रोलियम उत्पादों का विदेशों में निर्यात करती हैं। शुल्क कम होने से उन्हें निर्यात पर पहले की तुलना में कम टैक्स देना होगा। इससे कंपनियों के मार्जिन को राहत मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच तेल कंपनियों पर लागत का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में सरकार की यह दो हफ्ते की राहत कंपनियों के लिए निर्यात कारोबार में अतिरिक्त लागत कम करने का रास्ता खोलती है।



