पटना। ​आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और गुरुवार का पावन दिन है, जिस पर देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस बार विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का अत्यंत दुर्लभ एवं फलदायी संयोग बन रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

​कल-कारखानों और कार्यस्थलों पर विशेष अनुष्ठान

​आज के दिन देश भर के कल-कारखानों, गैराज, कंपनियों, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों, मोटर वाहन शोरूम और निर्माण से जुड़े तमाम स्थलों पर विशेष साफ-सफाई के बाद भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जा रही है। श्रमिक, शिल्पकार, इंजीनियर और व्यापारी अपने औजारों, मशीनों और उपकरणों की विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के सातवें धर्मपुत्र हैं। उन्होंने सतयुग में स्वर्ग लोक, त्रेता युग में लंका, द्वापर में द्वारिका और कलयुग में हस्तिनापुर का निर्माण किया था। इसके अलावा उन्होंने सुदामापुरी की भी रचना की थी।

​दुर्लभ योग और सूर्य गोचर का महासंयोग

​ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज रात 08:41 बजे तक अनुराधा नक्षत्र के बाद ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा। इसी समय तक सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का पुण्यकारी संयोग भी विद्यमान है, जो कारोबार और नौकरी-पेशा में विशेष उन्नति दिलाने वाला माना गया है। इसके अलावा, आज गुरुवार की देर रात 11:31 बजे सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे श्रेष्ठ योगों में भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से व्यापार में तीव्र वृद्धि और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

​व्यापार और करियर में तरक्की के लिए अचूक उपाय

  • ​नौकरी में उन्नति: शुभ मुहूर्त में भगवान विश्वकर्मा की विधिवत पूजा करने के बाद अपने से बड़ों का आशीर्वाद लें। इस दिन घी का दीपक जलाने के साथ-साथ पीली मिठाई और पीले वस्त्र का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
  • ​आर्थिक लाभ और बरकत: विश्वकर्मा जयंती के दिन अपने कार्यस्थल पर मशीनरी और उपकरणों की पूजा करें। साथ ही, भगवान विश्वकर्मा के वैदिक मंत्रों का सविधि जाप करने से व्यापार में अप्रत्याशित लाभ, कार्यकुशलता और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।