Gaganyaan Mission 2026 : चंडीगढ़ : भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मिशन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। वैज्ञानिकों ने मानव उड़ान के लिए जरूरी कई अहम तकनीकों का विकास और परीक्षण पूरा कर लिया है।

केंद्र सरकार ने बताया है कि गगनयान मिशन से जुड़ी प्रमुख प्रणालियां तैयार हैं। इनमें मानव उड़ान के लिए तैयार एलवीएम-3 रॉकेट, क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम और जीवन रक्षक तकनीकें शामिल हैं। इनकी सफलता अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।

जी-1 मिशन पर टिकी नजरें

मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले इसरो मानवरहित मिशन ‘जी-1’ को अंजाम देगा। इस परीक्षण में अंतरिक्ष यान की उड़ान, धरती पर वापसी, रिकवरी सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मिशन गगनयान की सफलता के लिए सबसे अहम पड़ाव होगा।

चारों गगनयात्रियों की ट्रेनिंग जारी

गगनयान के लिए चुने गए चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण लगातार जारी है। रूस में शुरुआती प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वे बेंगलुरु स्थित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में मिशन से जुड़े विशेष अभ्यास कर रहे हैं।

प्रशिक्षण में अंतरिक्ष यान संचालन, आपात स्थिति से निपटना, माइक्रोग्रैविटी में काम करने और जीवन रक्षक प्रणालियों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

भारत के अंतरिक्ष मिशनों को मिलेगी नई दिशा

गगनयान मिशन केवल भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों की नींव भी माना जा रहा है। इस मिशन से मिले अनुभव के आधार पर भारत आगे अंतरिक्ष स्टेशन और लंबे समय के मानव अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

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