अजयारविंद नामदेव, शहडोल। ये स्कूल वैन नहीं, बल्कि हादसे का चलता-फिरता खतरा है। शहडोल के NH-43 पर एक ऐसा खतरनाक नजारा सामने आया, जिसने स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज चार-पांच यात्रियों की क्षमता वाले ऑटो में 18 से ज्यादा स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाकर ले जाया जा रहा था। किसी बच्चे का शरीर अंदर दबा नजर आया तो कोई दरवाजे के पास खड़ा या लटका दिखाई दिया, सड़क पर दौड़ते इस ओवरलोड ऑटो का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर मासूमों की सुरक्षा से इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है।
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NH-43 पर कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
मामला अमलाई थाना क्षेत्र से गुजरने वाले NH-43 का बताया जा रहा है। सामने आए वीडियो में ऑटो के अंदर क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चे सवार दिखाई दे रहे हैं। जिस वाहन में सीमित यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है। उसमें करीब दो दर्जन बच्चों को भरकर सड़क पर दौड़ाया जा रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि यह कोई छोटी या सुनसान सड़क नहीं, बल्कि नेशनल हाईवे-43 है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यदि अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति बने, ऑटो अनियंत्रित हो जाए या किसी वाहन से टक्कर हो जाए, तो इतने बच्चों के पास खुद को संभालने तक की जगह नहीं होगी। एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
सवाल सिर्फ ऑटो चालक से नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा की निगरानी करने वाली पूरी व्यवस्था से है। क्या कुछ अतिरिक्त रुपये कमाने के लिए चालक इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को जोखिम में डाल सकता है।और यदि कोई हादसा हो जाए तो जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी,चालक की, स्कूल प्रबंधन की या निगरानी करने वाले संबंधित विभागों की…
एसपी की समझाइश बेअसर, दावों पर खड़े हुए सवाल
गौर करने वाली बात यह भी है कि हाल ही में शहडोल एसपी ने ऑटो चालकों की क्लास लेकर यातायात नियमों का पालन करने की समझाइश दी थी,इसके बावजूद NH-43 पर सामने आई यह तस्वीर बताती है कि केवल समझाइश काफी नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई और नियमित निगरानी भी जरूरी है।
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस और प्रशासन लगातार जागरूकता की बात करते हैं, लेकिन NH-43 की यह तस्वीर उन दावों के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी है। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और यह सुनिश्चित करें कि स्कूल जाने वाला हर बच्चा सुरक्षित पहुंचे, न कि क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चों को एक छोटे से ऑटो में बैठाकर उनकी जिंदगी जोखिम में डाली जाए…
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