गया। जिले के गुरपा स्थित रंगू नगर में बोरवेल में गिरे तीन साल के मासूम पीयूष कुमार के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। इस दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए डीएम शशांक शुभंकर ने जिले भर में असुरक्षित और खुले पड़े बोरवेलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
रेस्क्यू टीम का सम्मान और समर्पण
शनिवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में डीएम ने नन्हे पीयूष की जान बचाने वाली पूरी टीम को सम्मानित किया। इस दौरान एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय बीडीओ, सीओ और बचाव अभियान से जुड़े अन्य अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके साहस की सराहना की गई। डीएम ने कहा कि इन टीमों के अथक प्रयास और समन्वय से ही सात घंटे के भीतर पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
लापरवाही पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
डीएम शशांक शुभंकर ने मामले में लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस बोरवेल में पीयूष गिरा था, वह बिना ढक्कन के खुला छोड़ दिया गया था, जो सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। उन्होंने संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दे दिया है। डीएम ने साफ लहजे में कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी तरह की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी कोई भी हो, उस पर कार्रवाई तय है।
भविष्य के लिए सुरक्षा चक्र: इंजीनियरों को देना होगा सर्टिफिकेट
भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने पीएचईडी (PHED) विभाग को विशेष कार्ययोजना लागू करने को कहा है। अब जिले के सभी खुले और बेकार पड़े बोरवेलों को युद्धस्तर पर चिन्हित कर बंद किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि संबंधित क्षेत्र के इंजीनियरों को अब एक आधिकारिक प्रमाण-पत्र जमा करना होगा। इस प्रमाण-पत्र में उन्हें यह लिखित रूप में देना होगा कि उनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत एक भी बोरवेल खुला नहीं है और सभी को सुरक्षित ढंग से सील कर दिया गया है।
प्रशासन के इस सख्त रुख से स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है। अभिभावकों ने मांग की है कि ऐसे असुरक्षित बोरवेलों की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि कोई और बच्चा हादसे का शिकार न हो। जिला प्रशासन अब इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग खुद करेगा ताकि जिले को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके।

