देशभर से गयाजी आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए इस बार पितृपक्ष मेला के दौरान ठहरने की समस्या से निजात दिलाने हेतु जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक तैयारियां की हैं। पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए शहर में व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं।
70 हजार श्रद्धालुओं के लिए ठहरने के पुख्ता इंतजाम
इस बार पितृपक्ष के दौरान लगभग 70 हजार तीर्थयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पूरे जिले में 44 विद्यालय और महाविद्यालयों को आवासन केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, गांधी मैदान में करीब 2500 बेड की विशाल टेंट सिटी भी बनाई जा रही है, जहां श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क ठहरने का प्रबंध होगा।
प्रमुख आवासन केंद्र और उनकी क्षमता
प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए प्रमुख शिक्षण संस्थानों और धार्मिक स्थलों पर यात्रियों की संख्या के अनुसार ठहरने की क्षमता निर्धारित की गई है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- निगमा मोनास्ट्री: 2400 श्रद्धालु
- गया कॉलेज (मानवीकी भवन): 800 श्रद्धालु
- राम रुचि बालिका इंटर विद्यालय: 520 श्रद्धालु
- महावीर इंटर विद्यालय: 500 श्रद्धालु
- आकाश पॉलिटेक्निक (मानपुर): 250 श्रद्धालु
- अन्य प्रमुख स्थल: बोधगया से मानपुर तक फैले विभिन्न विद्यालय जैसे अनुग्रह कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, मारवाड़ी प्लस टू उच्च विद्यालय, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय रमना, मध्य विद्यालय कोसडीहरा, बीआईटी गया बुद्धा रिजॉर्ट, और गुरु नानक मध्य विद्यालय।
सहायता केंद्र और 132 शिक्षकों की विशेष तैनाती
आवासन केंद्रों पर केवल ठहरने की जगह ही नहीं, बल्कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
- बुनियादी सुविधाएं: यहां पेयजल, शौचालय, बिजली और साफ-सफाई जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं को चाक-चौबंद रखा जा रहा है।
- 24 घंटे निगरानी: श्रद्धालुओं की मदद के लिए 132 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो तीन पालियों में दिन-रात अपनी सेवाएं देंगे। ये शिक्षक यात्रियों की हर समस्या का समाधान सुनिश्चित करेंगे और अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।


