गया। मगध क्षेत्र के निवासियों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों और धार्मिक पर्यटकों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब जोर पकड़ रही है। गया जंक्शन से सीधे श्रीनगर तक ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए एक शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को ज्ञापन सौंपा है। सांसद प्रतिनिधि ई. नंदलाल मांझी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में इस रूट की महत्ता और तत्काल आवश्यकता पर बल दिया गया है।
सैनिकों की राह होगी आसान
मगध प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले नवादा, जहानाबाद, अरवल और औरंगाबाद जैसे जिलों के हजारों जवान वर्तमान में जम्मू-कश्मीर की दुर्गम सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे हैं। इन जवानों को छुट्टियों के दौरान अपने घर लौटने के लिए सीधी कनेक्टिविटी न होने के कारण भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में उन्हें लंबी दूरी तय करने के लिए कई ट्रेनों को बदलना पड़ता है जिससे न केवल उनका कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि यात्रा भी कष्टदायक हो जाती है। सीधी ट्रेन सेवा शुरू होने से इन रक्षकों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
यह रेल मार्ग केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। गया की पवित्र धरती, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ और विष्णुपद मंदिर जैसे ऐतिहासिक तीर्थ स्थल स्थित हैं का जुड़ाव सीधे माता वैष्णो देवी धाम से होने पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा। यह कनेक्टिविटी धार्मिक सर्किट को आपस में जोड़कर देश की सांस्कृतिक एकता को और अधिक मजबूत करेगी।
क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रोजगार
इस रेल मार्ग के संचालन से गया और श्रीनगर के बीच सामाजिक और व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी तेज होंगी। इससे गया के स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
सरकार से त्वरित पहल की अपेक्षा
शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से अनुरोध किया है कि वे इस जनहित के मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर रेल मंत्रालय के समक्ष उठाएं। गया के लोगों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मांग की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगी। यदि यह मांग पूरी होती है, तो यह मगध क्षेत्र के विकास और सैनिकों के मनोबल में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।

