कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को सदन में उस समय जबरदस्त हंगामा हो गया, जब कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल की ब्राह्मण समाज को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। मामला इतना बढ़ा कि भाजपा विधायकों ने गीता भुक्कल से माफी की मांग शुरू कर दी। बाद में कांग्रेस की ओर से सफाई देते हुए माफी मांगी गई, जबकि विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटवा दिया।
दरअसल, सदन में संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती के संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकारी संकल्प लेकर आए थे। इस दौरान कांग्रेस विधायक बीबी बत्तरा ने संत रविदास जयंती को लेकर प्रस्तावित कलश यात्रा की कमेटी में कांग्रेस के एससी सांसदों और विधायकों को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाया।
इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस तरह की बातों से उन्हें पीड़ा हो रही है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गुरु तेग बहादुर की 350वीं जयंती के कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को आमंत्रित किए जाने के बावजूद वह कार्यक्रमों में कहीं दिखाई नहीं दिए।
इसी बहस के दौरान भाजपा विधायक रामकुमार गौतम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आपके पप्पू को वंदे मातरम से क्या तकलीफ है।” इस पर हुड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन में वंदे मातरम गाया गया था और कांग्रेस ने भी उसका सम्मान करते हुए इसमें हिस्सा लिया था। हुड्डा ने रामकुमार गौतम की टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की मांग की।
इसके बाद बहस ने जातिगत टिप्पणी का रूप ले लिया। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने रामकुमार गौतम पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के गुण और आचरण को उसके समाज की पहचान नहीं बनाया जा सकता। इसी दौरान उन्होंने एक दोहा पढ़ते हुए ब्राह्मण समाज को लेकर टिप्पणी की और रामकुमार गौतम पर समाज में जातीय जहर घोलने का आरोप लगाया।
गीता भुक्कल की इस टिप्पणी पर भाजपा विधायक भड़क गए। सदन में विरोध और नारेबाजी जैसी स्थिति बन गई। भाजपा विधायकों ने कहा कि ब्राह्मण समाज को लेकर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती और गीता भुक्कल को माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा विधायक अरविंद शर्मा और मुकेश शर्मा ने भी गीता भुक्कल की टिप्पणी का विरोध किया। अरविंद शर्मा ने कहा कि इस तरह की बातें छोटी सोच को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बड़ी सोच के साथ काम कर रही है और सदन में किसी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।
विवाद बढ़ने पर मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि सरकार की ओर से संतों और महापुरुषों की जयंती मनाने के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि संतों और बुजुर्गों की मांग पर सरकार ने सभी संतों की जयंती सरकारी स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है।
मंत्री महिपाल ढांडा ने भी सदन में संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सभी सम्मान करते हैं और किसी भी समाज को लेकर ऐसी टिप्पणी से बचना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
मामला शांत कराने के लिए कांग्रेस विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने सदन में सफाई दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावना आहत हुई है तो वे क्षमा मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समुदाय उनके लिए पूजनीय है और गीता भुक्कल का आशय किसी पूरे समाज का अपमान करना नहीं था। उनका कहना था कि किसी भी समाज में महान और गुणवान व्यक्ति पैदा हो सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने हस्तक्षेप किया और गीता भुक्कल की विवादित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटवा दिया। इस तरह ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार माफी और कार्यवाही से विवादित शब्द हटाए जाने के बाद शांत हुआ।
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