करनाल। बिजली निगम के निलंबित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर के सुसाइड मामले में मौत के करीब 33 घंटे बाद बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के बाद अब मामले में पुलिस की ओर से दर्ज FIR और प्रशासन के साथ हुए समझौते को लेकर परिवार तथा समाज के लोगों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार, गीतू राम तंवर का शव 31 अगस्त को उनकी कार से बरामद हुआ था। इसके बाद सामने आए सुसाइड नोट को लेकर परिवार और समाज के लोगों ने मामले में नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। उनका कहना था कि सुसाइड नोट में जिन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

बाद में मृतक SE की पत्नी प्रीति तंवर की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की। समाज के लोगों का आरोप है कि FIR में शुरुआती तौर पर सामने आए दो नामों को हटा दिया गया, जबकि चार नए नाम शामिल कर दिए गए। नामों में हुए इस बदलाव को लेकर समाज के लोगों ने सवाल उठाए हैं और इसे लेकर नाराजगी जताई है।

बताया गया कि अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिवार के बीच एडीसी तथा एसपी की मौजूदगी में बातचीत हुई। बातचीत के दौरान परिवार को बकाया भत्ते जारी करने तथा पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित करने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए सहमत हुआ।

हालांकि, प्रशासन के साथ हुए इस समझौते से समाज के कई प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि वे न्याय की मांग को लेकर परिवार के साथ लगातार खड़े रहे, लेकिन अंतिम फैसला लेते समय उनकी सहमति नहीं ली गई। नाराज समाज के लोगों ने यहां तक कहा कि “भविष्य में हमें कभी मत बुलाना।”

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि गीतू राम तंवर के कथित सुसाइड नोट में वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अब समाज के लोग FIR में नामों के बदलाव और आगे होने वाली SIT जांच पर नजर बनाए हुए हैं।

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