गोरखपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को दिव्यांगजन को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरणों के वितरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. अपने संबोधन में योगी ने कहा कि बिना भेदभाव के शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाना, सुशासन का पहला सूत्र है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में पूरे देश में बिना भेदभाव के शासन की योजनाओं का लाभ समाज के हर तबके तक पहुंचाया गया. इसमें व्यक्ति, जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा कहीं आड़े नहीं आए. मंत्र एक ही था- ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’.

सीएम ने आगे कहा कि ‘आज मुझे सेवा संकल्प अभियान के क्रम में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है. माननीय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचा है. दिव्यांगजन को पहले 300 की पेंशन मिलती थी. हमने इसे पहले बढ़ाकर 500 और फिर 1,000 किया. अब कुछ ही दिनों में पेंशन राशि में और वृद्धि करने जा रहे हैं.’

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योगी ने आगे कहा कि ‘हम लोगों ने प्रदेश में बचपन डे-केयर सेंटर की व्यवस्था को और विस्तार देने का निर्णय लिया है. वर्ष 2026-27 के बजट में भी 3 से 7 वर्ष के श्रवण बाधित, बौद्धिक दिव्यांगता वाले और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए जनपद स्तर पर ऐसे केंद्रों के विस्तार का प्रावधान किया गया है. हमारी संस्कृति ने कभी यह नहीं माना कि कोई व्यक्ति अधूरा है. हमारे यहां कहा गया है— ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति’, अर्थात कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं है. दिव्यांगजन को CM YUVA, PM SVANidhi, ODOP, PM Vishwakarma, PM MUDRA और Stand-Up India जैसी योजनाओं से जोड़कर उन्हें अनेक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.’

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश की सभी 18 कमिश्नरियों में जिला दिव्यांगता पुनर्वास केंद्र संचालित करने के आदेश दिए गए हैं. गोरखपुर में भी यह सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के कैंपस में प्रारंभ हो गया है. ये दिव्यांगजन के कल्याण के लिए किए जा रहे वे प्रयास हैं, जिन्हें डबल इंजन सरकार आगे बढ़ा रही है. पूरे प्रदेश में Cochlear Implant जैसी सुविधाओं के लिए डिजिटल पहचान की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. किसी बच्चे में इसकी आवश्यकता की पहचान होने पर 6 लाख तक का खर्च डबल इंजन सरकार वहन करती है और Speech Therapy के लिए भी परिवार को सहयोग देती है. 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान को मजबूत कर उन्हें उनका कार्ड भी उपलब्ध कराया गया है. मैं इस बात को मानता हूं कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए. जब प्रतिभा को सही साधन, उचित प्रशिक्षण, परिवार का सहयोग और समाज का प्रोत्साहन मिलता है, तो वह अपनी क्षमता के अनुरूप ऊंचाइयों को छूने लगती है.