बिहार के राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा कदम उठाया है। राजभवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, समयबद्ध शैक्षणिक सत्र और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
​शुक्रवार को बिहार लोक भवन में जय प्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू), छपरा की शैक्षणिक, वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों की व्यापक समीक्षा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह समेत विश्वविद्यालय के अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के लिए भयमुक्त, सकारात्मक और स्वस्थ शैक्षणिक माहौल तैयार करना विश्वविद्यालय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

​परिसरों में एंटी रैगिंग और एंटी बुलिंग सेल का प्रभावी संचालन

​राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि परिसरों में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या उत्पीड़न को रोकने के लिए एंटी रैगिंग सेल और एंटी बुलिंग सेल का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए और इन्हें पूरी तरह प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। इन दोनों सेल्स को अत्यधिक सक्रिय रखते हुए विद्यार्थियों से मिलने वाली शिकायतों पर समयबद्ध और कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी मानसिक दबाव या डर के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र

​विद्यार्थियों के बढ़ते मानसिक तनाव और शैक्षणिक दबाव को ध्यान में रखते हुए, राज्यपाल ने प्रत्येक विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए एक समर्पित मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र खोलने का ऐतिहासिक निर्देश दिया है। इसके माध्यम से छात्रों को मानसिक संबल, सही मार्गदर्शन और पेशेवर परामर्श मिल सकेगा। इसके साथ ही, कुलपतियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों के साथ निरंतर और नियमित संवाद बनाए रखें ताकि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सके।

​पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण और ई-बुक्स की उपलब्धता

​विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों की स्थिति पर गहरी चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि लाइब्रेरी केवल किताबों का संग्रह नहीं, बल्कि शोध और ज्ञान का केंद्र होनी चाहिए। उन्होंने पुस्तकालयों में पर्याप्त संख्या में पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल संसाधनों और ई-बुक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। पुस्तकालयों को शोधार्थियों और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुकूल अत्यधिक उपयोगी एवं संसाधनयुक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया है।

​समय पर वेतन-पेंशन और डिग्री वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता

​प्रशासनिक मोर्चे पर सुधार लाते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन का भुगतान हर हाल में समय पर सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, राज्य के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्रों को पूरी तरह नियमित रखने और परीक्षा परिणामों के बाद विद्यार्थियों को ससमय डिग्रियां उपलब्ध कराने को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा गया है ताकि छात्रों के भविष्य का नुकसान न हो।
​जेपी विश्वविद्यालय की समीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
​राजभवन में आयोजित बैठक के दौरान जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. परमेन्द्र कुमार बाजपेयी ने विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति, मानव संसाधन, आधारभूत संरचनाओं, केंद्रीय पुस्तकालय, अध्ययन केंद्रों और शोध एवं विकास कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख बिंदुओं पर भी विस्तार से मंथन किया गया:

  • ​प्लेसमेंट और डिजिटल व्यवस्था: विद्यार्थियों के लिए बेहतर जॉब प्लेसमेंट के अवसर सृजित करने, वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
  • ​समर्थ पोर्टल और नियुक्तियां: समर्थ पोर्टल के उन्नत और बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया। साथ ही, पुस्तकालय व्यवस्था को सुचारू चलाने के लिए लाइब्रेरियन, सहायक लाइब्रेरियन और लाइब्रेरी असिस्टेंट के रिक्त पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया पर विचार किया गया।
  • ​सहगामी गतिविधियां और हैप्पीनेस इंडेक्स: विश्वविद्यालय परिसर में खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को मापने वाले ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जैसे नवीन विषयों पर भी सकारात्मक चर्चा की गई।

​राज्यपाल के इन दूरदर्शी और सख्त निर्देशों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बिहार के विश्वविद्यालयों की कार्यसंस्कृति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और परिसरों का माहौल दोनों बेहतर होंगे।