संजय पाटीदार, भोपाल। डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई (UPI) का यूज करने वाले लोगों के लिए एक जरूरी खबर आई है…15 अक्टूबर 2026 से यूपीआई का नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क लागू होने जा रहा है। नया नियम केवल 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा व्यावसायिक (P2M) ट्रांजैक्शंस पर ही लागू होगा। सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पेमेंट्स पहले की तरह पूरी तरह से फ्री रहेंगे… 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4% एमडीआर शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव के बाद भोपाल के व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है। चैंबर ऑफ़ कॉमर्स सचिव अजय देवनानी ने कहा कि व्यापारियों का बिजनेस लो प्रॉफिट बिजनेस है। 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क लगता है तो इज ऑफ डूइंग बिजनेस के विरुद्ध रहेगा। हम सरकार से आग्रह करेंगे कि इसमें पुनर्विचार होना।

व्यापारियों पर अतिरिक्त भार

किराना व्यापारी विवेक साहू ने बताया कि पहले सरकार ने डिजिटल कैशलेस के माध्यम से व्यापार करने को कहा और अब यूपीआई के माध्यम से 03.4% चार्ज लगा रही है इससे हम व्यापारियों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।

देश के हालात बिगड़ते जा रहे

UPI मर्चेंट पेमेंट में संशोधन की खबरों के बाद प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है। मानक अग्रवाल वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इसे अमेरिका के दबाव में काम करने का फैसला करार दे दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि देश के हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय

वाणी आहलूवालिया भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के बड़े आरोप के बाद पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस बिना पढ़े ओर अध्ययन किए बयान जारी करती है। कांग्रेस सुर्खियों में रहने के लिए बयान जारी करती है। हालांकि बड़े कारोबारियों को राहत देने के लिए 75,000 या उससे अधिक के भारी-भरकम पेमेंट्स पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. चाहे लेन-देन 1 लाख रुपये का हो या 5 लाख रुपए का चार्ज 300 रुपए से ज्यादा का नहीं होगा।

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