गुजरात के गांधीनगर में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ पेथापुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला 8 अक्टूबर की रात का है, जब वार्ड नंबर 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार को एक शिकायत के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि परमार और उनके साथियों ने बीजेपी के एक प्रचारक को धमकाया था और उसे उस इलाके में प्रचार न करने की चेतावनी दी थी।
शिकायत के अनुसार, जब पुलिस इंस्पेक्टर अपनी आधिकारिक ड्यूटी के तहत यूनुस परमार से पूछताछ कर रहे थे, तब विधायक जिग्नेश मेवाणी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने कथित तौर पर गैर-कानूनी भीड़ जुटाई, पुलिस स्टेशन के राइटर रूम में घुसे और पुलिसकर्मी को सरकारी काम करने से रोका। यह भी आरोप है कि आरोपियों ने हंगामा किया, अपशब्द कहे और परमार का बयान दर्ज नहीं होने दिया।
इसके अलावा, पुलिस स्टेशन के बाहर बैठकर एक विशेष समुदाय का नाम लेकर नारे लगाने और पुलिस के खिलाफ लोगों को भड़काने का भी आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस घटना का वीडियो मोबाइल पर रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिससे समुदायों के बीच तनाव और शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई। यह कार्रवाई गांधीनगर नगर निगम चुनाव के मतदान के दिन यानी रविवार को सामने आई।
मेवाणी और अन्य आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और गुजरात पुलिस एक्ट के तहत गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होने, दंगा करने, सरकारी काम में बाधा डालने और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं की है और मामले की जांच जारी है।
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