गुजरात सरकार ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए एक कड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अर्जित की जाने वाली चल-अचल संपत्ति और आय से अधिक संपत्तियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। इस संबंध में विजिलेंस कमीशन ने एक बेहद जरूरी आदेश जारी किया है, जिसके तहत राज्य सरकार के प्रत्येक विभाग में एक नया वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की संपत्तियों का सिस्टेमैटिक तरीके से सत्यापन करना है, ताकि आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी शिकायतों के मामलों में सभी विवरण तुरंत और आसानी से मिल सकें। इसी कड़ी में हाल ही में हुई विजिलेंस कमीशन की रिव्यू मीटिंग के आधार पर महिला और बाल विकास विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर सभी शाखाओं और कार्यालयों को इन नए नियमों का पूरी सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
क्लास-3 कर्मचारियों के लिए भी सालाना रिटर्न अनिवार्य
अब तक गुजरात स्टेट सर्विस रूल्स, 1971 के रूल-19 के प्रावधानों के अनुसार केवल क्लास 1 और क्लास 2 के गैजेटेड अधिकारी ही ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में अपना सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न अपडेट करते थे। लेकिन जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा किए गए बदलावों के बाद, अब क्लास-3 श्रेणी के कर्मचारियों के लिए भी हर साल अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा रिटर्न ऑनलाइन भरना अनिवार्य कर दिया गया है।
कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर तकनीकी निगरानी
सरकारी कार्यों और विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में चल रहे 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले सभी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स की रिपोर्ट हर तीन महीने में विजिलेंस कमीशन की टेक्निकल यूनिट को भेजी जाएगी। प्राप्त विवरणों के आधार पर प्रिवेंटिव विजिलेंस इंस्पेक्शन किया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं में वित्तीय नुकसान पहुंचाने वाले दोषी ठेकेदारों या एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ‘गुजरात पब्लिक वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट डिस्प्यूट्स ट्रिब्यूनल एक्ट-1992’ के प्रावधानों के तहत सख्त रिकवरी भी की जाएगी।
सेवानिवृत्ति या इस्तीफे के बाद भी नहीं रुकेगी कानूनी कार्रवाई
नए नियमों का सबसे कड़ा पहलू यह है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो केवल नौकरी से इस्तीफा देने, सेवा से हटाए जाने या सेवानिवृत्त होने मात्र से उनके खिलाफ चल रही पुलिस और कानूनी कार्रवाई नहीं रुकेगी। सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले दोषी कर्मचारियों तथा ठेकेदारों से तय नियमों और ट्रिब्यूनल एक्ट के तहत पाई-पाई की वसूली की जाएगी। यह कदम प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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