अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत के एक कपड़ा व्यापारी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया है। व्यापारी पर साड़ी के पल्लू पर भगवान बुद्ध की तस्वीर छापकर बेचने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कपड़े पर किसी धार्मिक प्रतीक या भगवान की तस्वीर छापने मात्र से कोई गलत इरादा (Malice) साबित नहीं होता है।

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब बौद्ध समुदाय के सदस्यों ने सूरत के सलाबतपुरा पुलिस थाने में कपड़ा व्यापारी भरत हरजीभाई शंकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि व्यापारी ने अपने व्यापारिक लाभ के लिए साड़ी पर भगवान बुद्ध की तस्वीर छापकर उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और धार्मिक भावनाओं का अपमान किया है।

इस शिकायत के खिलाफ कपड़ा व्यापारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुनाया कि साड़ी पर धार्मिक फोटो छापना या उसे बेचना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295-ए के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि इस कृत्य को धार्मिक मान्यताओं का जानबूझकर किया गया अपमान नहीं माना जा सकता और न ही इसमें दुर्भावनापूर्ण मंशा नजर आती है। अदालत के इस निर्णय से सूरत के व्यापारी को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

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