अहमदाबाद: 25 अक्टूबर 2026, रविवार को पूरे गुजरात में शरद पूर्णिमा (शरद पूनम) का पावन पर्व अत्यंत भक्तिभाव, उत्साह और रंगारंग आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष तिथि पर राज्य के पौराणिक मंदिरों में अलौकिक दर्शन का योग बना है, वहीं शहरों और कस्बों में पारंपरिक गरबा रातों का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है, इसी आस्था के साथ श्रद्धालु देर रात तक उत्सव मना रहे हैं।

डाकोर मंदिर में भगवान रणछोड़राय का दिव्य रूप

शरद पूर्णिमा के अवसर पर खेड़ा जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल डाकोर में स्थित श्री रणछोड़राय जी मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। आज तड़के से ही भगवान रणछोड़राय जी के दर्शन के लिए लाखों भक्त लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इस पावन दिन भगवान का अद्भुत और भव्य श्रृंगार किया गया है।

भगवान रणछोड़राय जी को रत्नजड़ित विशेष मुकुट, कौस्तुभ मणि और कीमती आभूषण धारण कराए गए हैं। इसके साथ ही भगवान को विशेष महाभोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर ‘जय रणछोड़, माखनचोर’ के जयकारों से गूंज उठा है। शरद पूनम के इस अलौकिक दर्शन का लाभ उठाने के लिए गुजरात के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं।

प्रमुख शक्तिपीठों और कृष्ण धामों में विशेष अनुष्ठान

डाकोर के अलावा, जगत मंदिर द्वारकाधीश और प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में भी श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा हुआ है।

  • द्वारकाधीश मंदिर: भगवान द्वारकाधीश का मनमोहक श्रृंगार कर विशेष महाआरती का आयोजन किया गया है।
  • अंबाजी मंदिर: माँ अंबे के दर्शन हेतु पहुंचे भक्तों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है।

इन सभी धार्मिक स्थलों पर देर रात तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती का आयोजन किया गया है, जहाँ अमृतमयी चांदनी के नीचे श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि दर्शनार्थियों को कोई परेशानी न हो।

चंद्र किरणों के बीच गरबा रास और महाप्रसाद

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ गुजरात की संस्कृति का अभिन्न अंग ‘गरबा’ भी इस रात का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट जैसे बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में विशेष ‘शरद पूनम गरबा नाइट’ का आयोजन किया गया है। रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों (चनिया-चोली और केडियूं) में सजे युवक-युवती ढोल की थाप और सुरीले गीतों पर देर रात तक गरबा रास रच रहे हैं।

शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे दूध-पौहा (दूध और पोहा) को चंद्रमा की रोशनी में रखकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी पूरे राज्य में श्रद्धापूर्वक निभाई जा रही है। गुजरात आज भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के संगम में पूरी तरह से सराबोर नजर आ रहा है।

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