चंडीगढ़। गुरदासपुर में सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) डॉ. अनूप्रीत कौर रंधावा को शनिवार को पंजाब पुलिस ने नेशनल हाईवे-54 (NH-54) के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवज़े के बँटवारे में कथित गड़बड़ियों के मामले में गिरफ़्तार कर लिया. यह हाईवे अमृतसर और बठिंडा होते हुए जम्मू और राजस्थान को जोड़ता है.

पंजाब सिविल सर्विस (PCS) की अधिकारी रंधावा पहले पट्टी की SDM रह चुकी हैं, और उस समय ज़मीन अधिग्रहण के लिए सक्षम अधिकारी (CALA) थीं. उन्हें तरनतारन पुलिस ने गुरदासपुर में उनके सरकारी आवास पर छापा मारने के बाद गिरफ़्तार किया. यह मामला 2019 में दर्ज किया गया था और यह हाईवे प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित ज़मीन के सरकारी मुआवज़े के फंड में कथित हेराफेरी से जुड़ा है. इसमें शामिल राशि लगभग 1.63 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.

गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए तरनतारन के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस सुरेंद्र लांबा ने बताया कि रंधावा को 2019 के हेराफेरी के मामले में हिरासत में लिया गया है, जिस पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है.

सूत्रों के अनुसार, हाईवे प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 2019 में पूरी की गई थी, जब रंधावा पट्टी की SDM और CALA के तौर पर काम कर रही थीं. पुलिस ने 5 सितंबर, 2019 को रंधावा और पाँच अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था. जाँच में पता चला था कि 1.63 करोड़ रुपए का मुआवज़ा कथित तौर पर धोखाधड़ी करके पाँच ऐसे लोगों के खातों में ट्रांसफ़र कर दिया गया था, जिनकी ज़मीन इस प्रोजेक्ट के लिए कभी अधिग्रहित ही नहीं की गई थी.

पंजाब सरकार ने इस घटना के छह महीने से ज़्यादा समय बाद रंधावा को निलंबित कर दिया था. यह कार्रवाई तब की गई, जब तरनतारन के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर प्रदीप कुमार सभरवाल ने नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन के मुआवज़े के तौर पर 40.6 लाख रुपये के भुगतान की जाँच के आदेश दिए थे.

2021 में, रंधावा और उनके भाई संदीप सिंह के ख़िलाफ़ एक और मामला दर्ज किया गया था. यह मामला सरकारी खजाने से 88 लाख रुपये की कथित हेराफेरी से जुड़ा था. बताया जाता है कि यह मामला भी कथित 1.63 करोड़ रुपये के मुआवज़ा घोटाले से ही जुड़ा हुआ था. यह मामला सबसे पहले तब सामने आया जब नवराज सिंह बरार ने तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर सभरवाल से शिकायत की. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 9 जनवरी, 2018 से 11 फरवरी, 2019 के बीच, ज़मीन अधिग्रहण के लिए जारी किया गया मुआवज़ा कथित तौर पर पाँच ऐसे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, जो इसके हकदार नहीं थे.

जांच में जिन लाभार्थियों के नाम सामने आए, उनमें अमृतसर के मानावाला की जसबीर कौर, तरन तारन के फतेहपुर अल्गो महमूदपुरा की राजविंदर कौर, कोट दसौंधी मल के सरताज सिंह और गुरजीत कौर, और अमृतसर के होशियार नगर के बिक्रमजीत सिंह शामिल थे.

जांच के नतीजों के आधार पर, 5 सितंबर, 2019 को सिटी पट्टी पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 409 और 120-B के तहत एक मामला दर्ज किया गया.

यह जांच उस ज़मीन अधिग्रहण से जुड़ी है, जिसकी प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा 5 जुलाई, 2013 को जारी एक राजपत्र अधिसूचना के बाद शुरू की गई थी. यह अधिग्रहण पट्टी उप-मंडल के तहत आने वाले छह गांवों — टटला, हरिके, नाथूपुर, बुह, मरहाना और जौनेके — से गुज़रने वाले NH-54 के लिए किया गया था. जांच के दौरान, अधिकारियों को कथित तौर पर पता चला कि पांचों आरोपी लाभार्थियों के नाम आधिकारिक अधिग्रहण अधिसूचना में शामिल नहीं थे. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मुआवज़ा कथित तौर पर ऐसे प्राधिकार पत्रों के ज़रिए जारी किया गया था, जिन पर रंधावा के हस्ताक्षर थे.