गुरुग्राम। सेक्टर-69 स्थित अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘गोल्फ हाइट्स’ को लेकर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DTCP) ने सख्त कदम उठाया है। प्रोजेक्ट के डेवलपर ओशन सेवन बिल्डटेक (OSB) का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। परियोजना में लंबे समय से निर्माण कार्य प्रभावित रहने और निर्धारित समय में खरीदारों को मकानों का कब्जा नहीं मिलने के मामले में यह कार्रवाई की गई है।

प्रोजेक्ट की खरीद-बिक्री पर भी रोक

लाइसेंस रद्द करने के साथ ही DTCP ने प्रोजेक्ट से जुड़ी संपत्तियों की खरीद-बिक्री, ट्रांसफर और नए लेन-देन पर रोक लगा दी है। विभाग का उद्देश्य प्रोजेक्ट की संपत्तियों को किसी तरह के अनधिकृत हस्तांतरण से बचाना और घर खरीदारों के हितों को सुरक्षित रखना है।

सीनियर टाउन प्लानर को सौंपा गया नियंत्रण

विभाग ने संबंधित सीनियर टाउन प्लानर को प्रोजेक्ट का नियंत्रण और प्रबंधन अपने हाथ में लेने के निर्देश दिए हैं। इसके जरिए परियोजना की मौजूदा स्थिति पर निगरानी रखने और खरीदारों के हितों की रक्षा करने की व्यवस्था की गई है।

तय समय पर नहीं मिला घर, लंबे समय से निर्माण प्रभावित

अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर खरीदारों को कब्जा दिया जाना था। आरोप है कि परियोजना में काफी समय से निर्माण कार्य प्रभावित रहा और निर्धारित अवधि में घर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके चलते बड़ी संख्या में होमबायर्स को परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें अपनी शिकायतों के समाधान के लिए DTCP तथा HRERA का रुख करना पड़ा।

लाइसेंस और बैंक गारंटी की शर्तों पर भी सवाल

मामले में लाइसेंस से जुड़ी शर्तों के पालन और बैंक गारंटी संबंधी प्रावधानों को पूरा नहीं करने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा डेवलपर पर सरकारी शुल्क का भुगतान नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। खरीदारों से प्राप्त राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठे हैं।

खरीदारों के हितों की सुरक्षा पर जोर

DTCP की कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य प्रोजेक्ट से जुड़े घर खरीदारों के वित्तीय हितों को सुरक्षित रखना बताया गया है। संपत्तियों के लेन-देन पर रोक लगाने और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने से प्रोजेक्ट की संपत्तियों को लेकर किसी तरह की अनियमितता की संभावना को रोकने की कोशिश की गई है।

अब सीनियर टाउन प्लानर के स्तर पर प्रोजेक्ट की स्थिति और आगे की प्रक्रिया पर निगरानी रहेगी। वहीं, लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे खरीदारों की नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक नियंत्रण के बाद परियोजना का निर्माण किस तरह आगे बढ़ता है और उन्हें अपने घर कब तक मिल पाते हैं।

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