वडोदरा। गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी वडोदरा में इस बार गणेशोत्सव का उत्साह चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में ‘नमो 4 विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान वडोदरा के गणेशोत्सव की सराहना करने और स्वच्छता की अपील का गहरा असर (मोदी इफेक्ट) देखा जा रहा है। शहर में इस वर्ष पंजीकृत गणेश पंडालों की संख्या बढ़कर 1,800 के पार पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष (1,700) की तुलना में एक नया रिकॉर्ड है।
सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर
वडोदरा शहर पुलिस आयुक्त नरसिम्हा कोमार के अनुसार, पुलिस प्रशासन द्वारा 1,800 से अधिक आयोजनों को आधिकारिक अनुमति दी गई है। इसके अलावा सैकड़ों छोटे समूहों ने भी गणपति स्थापना की है। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार ‘प्रोजेक्ट विश्वास’ के तहत नए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर ‘नेत्रम’ का उपयोग किया जा रहा है। सभी बड़े पंडालों में सीसीटीवी कैमरे, वालंटियर और स्वच्छता के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
125वें वर्ष में प्रवेश: तिलक और जुम्मा दादा से जुड़ा इतिहास
वडोदरा में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत का बेहद ऐतिहासिक कनेक्शन है। 1901 में प्रसिद्ध पहलवान जुम्मा दादा ने स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित होकर तत्कालीन बड़ौदा राज्य में पहली बार अपने अखाड़े (जुम्मा दादा व्यायाम मंदिर) से इसकी शुरुआत की थी। इस वर्ष यह आयोजन अपने 125वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। लोकमान्य तिलक, बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय से मिलने वडोदरा आया करते थे। युवाओं में देशभक्ति और सामाजिक एकता जगाने के उद्देश्य से तिलक के सुझाव पर ही अखाड़े में मिट्टी के गणपति की स्थापना शुरू हुई थी।
‘एक पंडाल-एक प्रकल्प’ से मिला नया मोड़
वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने इस उत्सव को नई दिशा देने के लिए एक विशेष प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें ‘एक पंडाल-एक प्रकल्प’ की शर्त रखी गई है, जिससे पंडाल केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर समाजसेवा, पर्यावरण और सामाजिक कार्यों के लिए भी प्रेरित होंगे। सर्वश्रेष्ठ पंडालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। गायकवाड़ रियासत के ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में भी गणपति स्थापना की भव्य परंपरा आज भी जारी है।
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