गुरुग्राम। गुरुग्राम में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत काम करने वाले 20 लाख से अधिक कर्मचारियों को इलाज के दौरान दवाइयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शहर की 20 से अधिक ईएसआईसी डिस्पेंसरियों में कई महीनों से महंगी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को दवाइयां निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। परेशानी यह है कि इन दवाइयों के बिलों का भुगतान भी करीब डेढ़ साल से अटका हुआ है।

कर्मचारी हर महीने अपने वेतन से 25 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान ईएसआईसी में जमा कराते हैं। इसके बावजूद जरूरत के समय डिस्पेंसरी से दवाइयां नहीं मिल रही हैं। मरीजों को बजट नहीं होने का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है। गुरुग्राम सर्कल में कर्मचारियों के करीब 20 करोड़ रुपये के बिल बकाया बताए जा रहे हैं।

पर्ची पर लिख देते हैं NA, बाहर से खरीदनी पड़ती हैं दवाइयां

ईएसआईसी की डिस्पेंसरियों में दवाइयां उपलब्ध नहीं होने पर कर्मचारी मरीज की पर्ची पर NA यानी नॉट अवेलेबल लिख देते हैं। इसके बाद मरीज को संबंधित दवा निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है। दवा खरीदने के बाद कर्मचारी उसका बिल डिस्पेंसरी में जमा कराते हैं। बजट जारी होने पर ईएसआईसी की ओर से भुगतान किया जाता है।

हालांकि, लंबे समय से बजट जारी नहीं होने के कारण बिलों का भुगतान अटका हुआ है। कर्मचारी भुगतान के लिए डिस्पेंसरियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बजट नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।

एक साल से अधिक समय पहले जमा किए बिल, अब तक भुगतान नहीं

ईएसआई डिस्पेंसरी में इलाज कराने वाले राजकुमार ने बताया कि उन्होंने करीब एक साल पहले दवाइयों के बिल जमा कराए थे, लेकिन अब तक भुगतान नहीं मिला है।

लवकेश ने बताया कि उनकी पत्नी बीमार हैं। उन्होंने भी एक साल से अधिक समय पहले दवाइयों के बिल जमा कराए थे। इसके बावजूद उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला।

गुरुग्राम समेत छह जिलों को कवर करता है सर्कल

ईएसआईसी का गुरुग्राम सर्कल गुरुग्राम के अलावा नूंह, रेवाड़ी, नारनौल, बहादुरगढ़ और झज्जर जिलों को कवर करता है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बजट जारी करने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से मांग की गई है। इसके बावजूद राशि नहीं मिलने से कर्मचारियों के बिल लंबित हैं।

अधिकारियों ने बकाया राशि 150 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात भी कही है। वहीं, गुरुग्राम सर्कल के स्तर पर करीब 20 करोड़ रुपये के बिल लंबित बताए जा रहे हैं।

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