कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में युवतियों और नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेश पुलिस पर बेहद तल्ख और सख्त टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि पुलिस लापता लड़कियों की तलाश को गंभीरता से नहीं ले रही है। कोर्ट ने पुलिस को नसीहद देते हुए कहा कि भविष्य में गुमशुदगी के ऐसे मामलों को सामान्य ढंग से न लिया जाए।

4 माह बाद भी पुलिस के हाथ खाली, जांच अधिकारी बदलने के निर्देश

दरअसल हाल ही में भिंड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र में एक युवती लापता हो गई थी। पुलिस की लचर कार्यप्रणाली का आलम यह रहा कि 4 महीने बीत जाने के बाद भी जांच टीम के हाथ खाली रहे और युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका। पुलिस की इस घोर लापरवाही पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच अधिकारी को बदलने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी प्रभावी और काबिल अधिकारी को इस केस की जांच सौंपी जाए जो लापता युवती की तलाश में हरसंभव प्रयास कर सके।

SP की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल

सुनवाई के दौरान माननीय कोर्ट का गुस्सा यहीं नहीं थमा। हाईकोर्ट ने इस मामले में भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई कि जिले के मुखिया होने के बावजूद ऐसे संवेदनशील मामलों में मॉनिटरिंग का स्तर बेहद कमजोर है। हाईकोर्ट के इस तल्ख रुख के बाद मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस आदेश के जरिए कोर्ट ने पूरे प्रदेश की पुलिस को एक कड़ा संदेश दिया है कि महिलाओं और बच्चियों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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