अभय मिश्रा, मऊगंज। जब रक्षक ही जब भक्षक बन जाए, तो न्याय की गुहार किसके सामने लगाई जाए? मामला मऊगंज जिले के हनुमना थाना अंतर्गत पिपराही चौकी का है। यहाँ पुलिस की कस्टडी से एक-दो लीटर नहीं, बल्कि पूरा 2000 लीटर डीजल गायब हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस का तर्क है कि डीजल ‘उड़’ गया। एक पीड़ित, जिसने पाई-पाई जोड़कर अपनी बोरिंग मशीन के लिए डीजल खरीदा, पुलिस ने उसे जप्त किया। कलेक्टर के आदेश पर पीड़ित ने 1,81,630 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी भर दिया। लेकिन जब वह अपनी गाड़ी लेने चौकी पहुँचा, तो उसे मिला सिर्फ धोखा और खाली टैंकर। आखिर पुलिस की नाक के नीचे, ताला लगी टंकी से डीजल कैसे चोरी हुआ? क्या हनुमना पुलिस अब तेल के व्यापारियों के साथ मिलकर नया खेल खेल रही है?या मामला कुछ और है ?
2000 लीटर डीजल से लदी पिकअप गाड़ी से गायब हुआ डीजल भ्रष्टाचार और पुलिसिया मनमानी की जीती-जागती मिसाल है। मऊगंज निवासी सुमित कुमार गुप्ता की इस गाड़ी को साल 2022 में पिपराही पुलिस ने जप्त किया था। आरोप था अवैध परिवहन का। गाड़ी में लदा था 2000 लीटर डीजल। सुमित ने कानून का सम्मान किया, लंबी लड़ाई लड़ी और अंततः कलेक्टर कोर्ट से राहत मिली। लेकिन असली मानसिक प्रताड़ना तो अब शुरू हुई है।
कलेक्टर के आदेश पर सुमित ने 1,81,630 रुपये का जुर्माना सरकारी खजाने में जमा किया। उम्मीद थी कि गाड़ी और डीजल वापस मिलेगा। लेकिन जब सुमित चौकी पहुँचा, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। गाड़ी के टैंकर का ताला लगा था और 2000 लीटर डीजल का नामो-निशान तक नहीं था। जब सुमित ने सवाल किया, तो जवाब मिला— ‘डीजल उड़ गया’। साहब! विज्ञान कहता है कि पेट्रोल-डीजल उड़ता है, लेकिन क्या 2000 लीटर डीजल पुलिस के कड़े पहरे एवं पूरी सुरक्षा के साथ बंद टंकी से हवा हो सकता है? या फिर इसे पुलिस के ही संरक्षण में ‘ठिकाने’ लगा दिया गया?
आपको बता दे कि हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकड़े का विवादों से पुराना नाता रहा है। ये वही थाना प्रभारी है जिनके कार्यकाल में जहाँ महज 50 मिनट में 6 FIR दर्ज हो जाती हैं और गवाह भी ‘सेट’ होते हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी के निजी चालक को भी गवाह बनाया जाता है। चर्चा तो यह भी है कि काकड़े साहब खुलेआम कहते हैं कि ‘जब तक आईजी साहब हैं, कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता’। फिरभी आखिर ऐसे अधिकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्यों 300 से अधिक संदिग्ध मामलों में सेट गवाहों का मामला सामने आने के बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हुई?
अब जब पीड़ित सुमित गुप्ता दोहरी मार झेल रहा है। करीब पौने दो लाख का डीजल खरीदा और उतना ही जुर्माना भरा। यानी साढ़े तीन लाख से ज्यादा की चपत लगी ! ऊपर से अब थाना प्रभारी द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। सवाल मऊगंज पुलिस से है— क्या हनुमना पुलिस को भ्रष्टाचार का खुला लाइसेंस मिला है? क्या चौकी के अंदर जप्त माल की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं है? अगर पुलिस की चौकी में सामान सुरक्षित नहीं, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे समझे?
इस मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, तो दूसरी तरफ ‘साहब’ अपने रसूख के दम पर मामला दबाने में जुटे हैं। देखना होगा कि क्या जिले के आला अधिकारी इस ‘डीजल कांड’ की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर हनुमना पुलिस की ये ‘उड़ने वाली थ्योरी’ फाइलों में दबकर रह जाएगी।
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