चंडीगढ़। हरियाणा में सामने आए करीब 650 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक घोटाले के बाद राज्य सरकार ने वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश जारी करते हुए पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान संचालित डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) बैंक खातों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। सरकार का उद्देश्य सरकारी धन के उपयोग की समीक्षा करना और वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाओं को समय रहते रोकना है।

सभी विभागों से मांगा गया पांच साल का रिकॉर्ड

वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक संचालित सभी डीडीओ बैंक खातों का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में भेजना होगा। विभागों को यह जानकारी हार्ड कॉपी और डिजिटल दोनों स्वरूपों में एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध करानी होगी। इसके आधार पर सरकार विभिन्न विभागों के वित्तीय लेनदेन का तुलनात्मक अध्ययन करेगी।

खर्च और शेष राशि का होगा विश्लेषण

सरकार ने प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत तक सक्रिय रहे बैंक खातों की संख्या, उन खातों के माध्यम से किए गए कुल व्यय और 31 मार्च तक उपलब्ध शेष राशि का पूरा ब्यौरा मांगा है। इसके साथ ही खातों को खर्च के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन खातों में धन का उपयोग प्रभावी ढंग से हुआ और किन खातों में राशि निष्क्रिय पड़ी रही।

निष्क्रिय खातों पर रहेगी विशेष नजर

इस समीक्षा अभियान में उन बैंक खातों को विशेष रूप से चिन्हित किया जाएगा, जिनमें पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ। ऐसे मामलों में संबंधित डीडीओ का नाम, पद, विभाग, बैंक का नाम, खाता संख्या और प्रत्येक वर्ष के अंत तक मौजूद क्लोजिंग बैलेंस की जानकारी भी मांगी गई है। इससे निष्क्रिय खातों और संभावित अनियमितताओं की पहचान आसान होगी।

घोटाले के बाद बढ़ी सख्ती

हाल ही में सामने आए बैंक घोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में आए हैं। इस मामले में कई सरकारी विभागों के नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और कई अधिकारी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने पूरे तंत्र की वित्तीय समीक्षा शुरू की है।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि सभी विभागों के बैंक खातों की विस्तृत जांच से सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। साथ ही भविष्य में वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, जवाबदेही बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा। यह अभियान सरकारी वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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