कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में त्रुटि सुधारने के लिए निर्धारित शुल्क को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि जैसी जानकारी में गलती सुधारने के लिए अब अभ्यर्थियों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पार्टी ने इसे सरकार की ‘उगाही’ करार देते हुए शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का दावा है कि पहले मार्कशीट और प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार के लिए करीब 1,400 रुपये तक शुल्क लिया जाता था। यदि बोर्ड मुख्यालय से हाथों-हाथ संशोधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना हो तो 500 रुपये अतिरिक्त देने पड़ते थे। पार्टी के मुताबिक अब प्रमाण पत्र की उम्र के आधार पर अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिससे पुरानी गलती सुधारना काफी महंगा हो गया है।

कांग्रेस के अनुसार, छह साल से अधिक पुराने दस्तावेज में नौ साल तक की अवधि होने पर 3,000 रुपये जुर्माना और 1,400 रुपये शुद्धि शुल्क मिलाकर 4,400 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं, नौ से 12 साल पुराने दस्तावेज के मामले में 6,000 रुपये जुर्माने के साथ 1,400 रुपये शुल्क यानी कुल 7,400 रुपये देने होंगे।

इसी तरह 12 से 15 साल पुराने प्रमाण पत्र में सुधार के लिए 9,000 रुपये जुर्माना और 1,400 रुपये शुद्धि शुल्क मिलाकर 10,400 रुपये का खर्च आने का कांग्रेस ने दावा किया है। पार्टी के मुताबिक 15 साल से अधिक पुराने दस्तावेज में यह राशि 10,000 रुपये जुर्माने और 1,400 रुपये शुल्क के साथ 11,400 रुपये तक पहुंच जाती है। यदि संशोधित प्रमाण पत्र हाथों-हाथ लेना हो तो इसमें 500 रुपये अतिरिक्त जुड़ने का दावा भी किया गया है।

कांग्रेस ने कहा कि प्रमाण पत्र में टाइपिंग की गलती, क्लर्कियल त्रुटि या किसी मानवीय भूल के कारण दर्ज गलत जानकारी को ठीक कराने की प्रक्रिया पहले ही आम लोगों के लिए परेशानी वाली होती है। ऐसे में पुराने दस्तावेजों के लिए भारी जुर्माना लगाने से विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।

पार्टी ने आरोप लगाया कि शुल्क का बोझ केवल प्रमाण पत्र में संशोधन तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने माइग्रेशन सर्टिफिकेट, दस्तावेजों के सत्यापन, री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में भी फीस को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में विद्यार्थियों को राहत देने के बजाय उनकी जेब पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

कांग्रेस ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। पार्टी ने सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दे उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके बजाय प्रमाण पत्रों में सुधार जैसी प्रशासनिक प्रक्रिया को महंगा किया जाना विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला कदम है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पर तंज कसते हुए उसे ‘वसूली सरकार’ बताया और कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के बजाय अलग-अलग सेवाओं के नाम पर लोगों से अधिक शुल्क लिया जा रहा है। हालांकि, फीस और जुर्माने को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरकार या हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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