कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान सामने आई है। इस बार मामला किसी विरोधी दल का नहीं है। पार्टी के ही कुछ नेता अपने ही नेताओं से नाराज नजर आ रहे हैं। कहीं संगठन की नियुक्ति पर सवाल उठे हैं। कहीं नेतृत्व की रणनीति पर आपत्ति जताई गई है।

सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने पार्टी की एक नियुक्ति पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्हें एक वरिष्ठ नेता को सिरसा में प्रदर्शन का पर्यवेक्षक बनाए जाने पर आपत्ति है। यह नियुक्ति 8 अक्टूबर को होने वाले कांग्रेस के प्रदर्शन से जुड़ी है। सेतिया ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी बात रखी।

सेतिया का कहना है कि उनके कुछ नेताओं से पुराने राजनीतिक मतभेद हैं। ऐसे में उन्हीं नेताओं को सिरसा की जिम्मेदारी देना उन्हें ठीक नहीं लगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

सेतिया ने यह भी कहा कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को उनके पुराने राजनीतिक मतभेदों की जानकारी है। इसके बावजूद यह फैसला लिया गया। इसी बात ने उनकी नाराजगी बढ़ा दी। हालांकि उन्होंने वरिष्ठ नेता के प्रति सम्मान की बात भी कही है।

दूसरी तरफ कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। शर्मा ने चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

शर्मा ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की पैरवी की है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के चेहरे का फैसला पहले से नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह मुद्दा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा है।

इस पत्र में मौजूदा प्रदेश नेतृत्व की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। खास बात यह है कि यह विवाद 2029 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले सामने आया है। ऐसे में पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यानी कांग्रेस में इस समय दो अलग-अलग मोर्चे दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ स्थानीय स्तर पर नियुक्तियों को लेकर नाराजगी है। दूसरी तरफ भविष्य के नेतृत्व को लेकर सवाल हैं।

दोनों मामलों का मुद्दा अलग है। लेकिन संकेत एक ही तरफ जाता है। पार्टी के भीतर सभी नेताओं के बीच तालमेल अभी आसान नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस के अंदर की सियासत एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

अब नजर पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर है। क्या नाराज नेताओं की आपत्तियों को दूर किया जाएगा? या आने वाले दिनों में ऐसे और मामले सामने आएंगे? फिलहाल इन सवालों के जवाब पार्टी के अगले फैसलों से ही मिलेंगे।

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