चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने रतिया से विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कांग्रेस विधायक दल के चीफ व्हिप भारत भूषण बत्रा की ओर से जारी नोटिस में विधायक से 30 दिन के भीतर बिंदुवार जवाब मांगा गया है। मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 27 अगस्त से 1 सितंबर तक चले विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल ने एक काम रोको प्रस्ताव के समर्थन में तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया था। पार्टी के निर्देश के मुताबिक विधायकों को सदन में मौजूद रहकर प्रस्ताव के समर्थन में खड़े होना था। आरोप है कि जरनैल सिंह ने इस निर्देश का पालन नहीं किया।

नोटिस के मुताबिक, पार्टी के सचेतक इंदुराज नरवाल ने विधायक को व्हिप व्यक्तिगत रूप से देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने इसे लेने या इसकी प्राप्ति स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद जब सदन में प्रस्ताव आया तो कांग्रेस के अन्य विधायक उसके समर्थन में खड़े हुए, जबकि जरनैल सिंह सदन में मौजूद होने के बावजूद पार्टी के निर्देश के अनुसार समर्थन में खड़े नहीं हुए।

इसके अलावा नोटिस में फोटो और वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि जरनैल सिंह सदन में पोस्टर और प्लैकार्ड लेकर सत्ता पक्ष की ओर गए और सत्तापक्ष के सदस्यों के साथ नारेबाजी की। कांग्रेस ने इन घटनाओं को पार्टी के अधिकृत निर्देशों से अलग आचरण के तौर पर नोटिस में उठाया है।

10वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की चेतावनी

कांग्रेस ने नोटिस में संविधान की 10वीं अनुसूची का भी उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि यदि विधायक का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो विधानसभा सदस्यता से अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष याचिका दायर करने पर विचार किया जा सकता है। यानी फिलहाल सदस्यता रद्द नहीं हुई है, बल्कि जवाब के बाद संभावित कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जरनैल सिंह रतिया (एससी) विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। इससे पहले भी इस साल राज्यसभा चुनाव से जुड़ी कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के मामले में उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

अब सभी की नजर विधायक जरनैल सिंह के जवाब पर है। 30 दिन की समयसीमा में उनका पक्ष सामने आने के बाद ही कांग्रेस की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।