चंडीगढ़। हरियाणा में महिला जनप्रतिनिधियों को लेकर राज्य सूचना आयोग ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अब महिला सरपंचों की जगह उनके पति या कोई अन्य अनधिकृत व्यक्ति सरकारी कार्यवाही में पैरवी नहीं कर सकेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित मामलों में महिला सरपंचों को स्वयं उपस्थित होना होगा।
राज्य सूचना आयोग के उप राज्य सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि आयोग के समक्ष आने वाले मामलों में निर्वाचित महिला सरपंच ही पक्ष रखेंगी। उनके स्थान पर पति, रिश्तेदार या कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित होकर कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेगा।
‘सरपंच पति’ की एंट्री पर रोक
आयोग ने साफ किया है कि यदि भविष्य में किसी महिला सरपंच की ओर से उनका पति या कोई अन्य अनधिकृत प्रतिनिधि पेश होता है, तो ऐसी पैरवी को मान्यता नहीं दी जाएगी। आयोग ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की भावना के विपरीत बताया है।
महिला नेतृत्व को मिलेगा बढ़ावा
आयोग का मानना है कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देकर नेतृत्व का अवसर दिया गया है। ऐसे में उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उन्हें स्वयं करना चाहिए। इससे न केवल महिलाओं की प्रशासनिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि पंचायत स्तर पर उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम
इस आदेश को पंचायतों में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले ‘सरपंच पति’ कल्चर पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि महिला जनप्रतिनिधियों की जगह किसी अन्य व्यक्ति की दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

