फरीदाबाद, गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, इससे करीब 7 लाख उपभोक्ता और 30 हजार उद्योग सीधे प्रभावित हो सकते हैं। हड़ताल के दौरान बिजली गुल होने पर शिकायत केंद्रों और फोन हेल्पलाइन की सेवाएं भी प्रभावित रहने की आशंका है।

लघु उद्योग भारती के रवि भूषण खत्री ने कहा कि जिले में रोजाना 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर कारोबार ठप पड़ सकता है। वहीं, इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने निजीकरण के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने जलाए आदेश की प्रतियां

बिजली कर्मचारियों ने सांझा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पलवल डिवीजन के सभी एसडीओ कार्यालयों पर प्रदर्शन किया। इस दौरान हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के निजीकरण संबंधी आदेश की प्रतियां जलाई गईं।

कर्मचारियों ने गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने का विरोध किया। उनका कहना है कि सरकार जनसेवा से जुड़े क्षेत्र को निजी कंपनियों को सौंपना चाहती है।

5 हजार करोड़ के निवेश का दिया हवाला

ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया कि बिजली निगम में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश किए जाने के बावजूद निजीकरण किया जा रहा है। कर्मचारियों का विरोध बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के फैसले को लेकर है।

राज्य उपप्रधान जितेंद्र तेवतिया ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। कर्मचारियों ने कहा कि वे निजीकरण के बजाय बिजली व्यवस्था से जुड़ी अपनी मांगों के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

जोखिम भत्ता, भर्ती और पुरानी पेंशन की भी मांग

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध के साथ अपनी अन्य मांगें भी उठाईं। इनमें जोखिम भत्ता, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना, रिक्त पदों पर भर्ती, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना और पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है।

कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, सरकार के आश्वासन के बाद पहले प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गई थी। लेकिन मांगों का समाधान नहीं होने के कारण अब 22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल की जा रही है।

किसानों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन

हड़ताल को किसानों के साथ सीटू, इंटक और सर्व कर्मचारी संघ का समर्थन मिला है। प्रदर्शन की अध्यक्षता एचएसईबी वर्कर यूनियन के यूनिट प्रधान नंदकिशोर ने की, जबकि संचालन एएचपीसी वर्कर यूनियन के सचिव सुरजीत सौरोत ने किया।

हड़ताल के दौरान बिजली सेवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर उपभोक्ताओं और उद्योगों की चिंता बढ़ सकती है। कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण के फैसले और लंबित मांगों को लेकर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।

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