अजय सैनी, भिवानी। हरियाणा के कृषि और किसान कल्याण विभाग ने राज्य में ग्वार फसल की पैदावार बढ़ाने और भूजल संकट से निपटने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में भिवानी जिले के बहल खंड के अंतर्गत आने वाले गांव सिधनवा में एक विशेष राज्य स्तरीय कृषि शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पहुंचे ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और गिरते वाटर लेवल को देखते हुए सही समय पर बुवाई करने की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। यह पूरा शिविर एटीएम डॉ. मदन सिंह की देखरेख में संपन्न हुआ।

संतुलित खाद और मिट्टी की जांच पर जोर शिविर में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अपने खेतों से मिट्टी का सैंपल लेने का सही तरीका सिखाया। डॉ. बी.डी. यादव ने किसानों को सलाह दी कि वे बुवाई से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच नजदीकी सरकारी प्रयोगशाला में जरूर करवाएं। मिट्टी परीक्षण से जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की असली स्थिति का पता चलता है। इसके आधार पर किसान जरूरत के मुताबिक संतुलित मात्रा में खाद डाल सकते हैं, जिससे लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है। इसके साथ ही उन्होंने खेतों में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालने की अपील की ताकि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहे।

जड़ गलन और झुलसा रोग से बचाव के लिए कारगर नुस्खे हरियाणा में ग्वार की कम पैदावार के पीछे सबसे बड़ा कारण जड़ गलन और झुलसा रोग माना जाता है। इस बीमारी में पौधों की जड़ें काली पड़ जाती हैं और पूरा पौधा सूख जाता है। इससे बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को रामबाण नुस्खा बताते हुए कहा कि बीज की बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 3 ग्राम कार्बेन्डाजिम (बेविस्टीन) दवा से उपचारित जरूर करें। केवल कुछ रुपयों के इस बीज उपचार से फसल को 95 प्रतिशत तक इस बीमारी से बचाया जा सकता है और किसान होने वाले बड़े नुकसान से बच सकते हैं।

प्रमाणित किस्मों की ही बुवाई करने की सलाह

इन उन्नत किस्मों की बुवाई करने की सलाह राज्य के किसानों को ग्वार की एचजी-365 और एचजी-563 जैसी उन्नत और प्रमाणित किस्मों की ही बुवाई करने की सलाह दी गई है। ये दोनों ही किस्में महज 85 से 100 दिनों के भीतर पककर तैयार हो जाती हैं। कम समय में तैयार होने के कारण किसान इस फसल की कटाई के बाद रबी सीजन में सरसों की खेती भी आसानी से कर सकेंगे। वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि वे छिटकवां विधि के बजाय पोरा विधि से ही बुवाई करें और प्रति एकड़ केवल 4 से 5 किलो बीज का ही इस्तेमाल करें।

गिरते भूजल स्तर पर चिंता

मानसून के बाद बुवाई की अपील कृषि विभाग ने क्षेत्र में लगातार नीचे जा रहे भूजल स्तर पर गहरी चिंता जताई। डॉ. यादव ने साफ कहा कि किसानों को सिंचाई करके ग्वार की बुवाई करने से बचना चाहिए। ग्वार की बुवाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे अच्छा समय माना जाता है। इसलिए किसान जल्दबाजी न करें और राज्य में अच्छी मानसूनी बारिश होने के बाद ही खेतों में ग्वार की बुवाई शुरू करें। इससे पानी की भारी बचत होगी।

मुफ्त किट इस राज्य स्तरीय शिविर में पहुंचे

किसानों को बांटी गई मुफ्त किट इस राज्य स्तरीय शिविर में पहुंचे करीब 65 किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की बेविस्टीन दवा और सेफ्टी के लिए एक जोड़ी दस्ताने हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स, भिवानी की तरफ से मुफ्त में बांटे गए। इसके साथ ही एटीएम डॉ. मदन सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बारीकियों, प्राकृतिक खेती के फायदों और फसल चक्र अपनाने के लाभ समझाए। इस मौके पर नंबरदार सुभाषचंद समेत इलाके के कई प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।