चंडीगढ़। हरियाणा में आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। भाखड़ा और पौंग बांधों में पिछले साल के मुकाबले पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। भाखड़ा बांध में 38 फीट और पौंग बांध में 22 फीट कम पानी होने के कारण हरियाणा के अलावा पंजाब और राजस्थान की चिंता भी बढ़ गई है।

घट रही है बांधों में पानी की आवक

स्थिति यह है कि दोनों प्रमुख बांधों में पानी की आवक भी लगातार घट रही है। ऐसे में आगामी रबी सीजन के दौरान सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जलस्तर में आई इस गिरावट का असर केवल कृषि कार्यों पर ही नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रबी सीजन के तहत गेहूं और अन्य फसलों की बुआई 1 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर तक चलती है, जिस दौरान सिंचाई के लिए पानी की मांग सबसे अधिक होती है।

कृषि और नहरों पर निर्भर व्यवस्था

भाखड़ा बांध हरियाणा सहित कई राज्यों की सिंचाई और जलापूर्ति व्यवस्था की रीढ़ है। बांध में जलस्तर 38 फीट कम होने से पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जलस्तर में कमी का सीधा असर आपूर्ति पर पड़ता है, तो कृषि क्षेत्र में सिंचाई का प्रबंधन प्रभावित होना तय है। हालांकि, स्थिति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि बांधों में कुल जल भंडारण कितना है और विभिन्न राज्यों के लिए निर्धारित जल हिस्सेदारी क्या है।

हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि काफी हद तक नहरों और अन्य सिंचाई स्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में बांधों का जलस्तर कम रहने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि नहरों में पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तो फसलों की सिंचाई के समय और कुल कृषि उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है।

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