हरियाणा के मुख्यमंत्री ने नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) की समीक्षा बैठक कर युवाओं के कौशल विकास और त्वरित प्लेसमेंट के लिए जिला स्तर पर नियमित जॉब फेयर आयोजित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में युवा सशक्तिकरण और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) की व्यापक समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों से जोड़ने के लिए जिला स्तर पर जॉब फेयर की संख्या बढ़ाई जाए तथा इन्हें नियमित और परिणामोन्मुख बनाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण और रोजगार विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया, ताकि कौशल-आधारित प्रशिक्षण के साथ रोजगार के ठोस अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह रोजगार सृजन के दिशा में ठोस परिणाम दिखने चाहिए और योजनाओं को प्रभावी कर लक्ष्यित युवा समूहों तक पहुंचाना होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिला स्तरीय जॉब फेयर केवल अवसर प्रदर्शित करने तक सीमित न रहें; उन्हें उद्योगों की वास्तविक भर्ती प्रक्रियाओं से जोड़कर तुरंत प्लेसमेंट की संभावनाओं पर केंद्रित किया जाए। इसके साथ ही प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों को स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप अपडेट करने, अप्रेंटिसशिप के दौरान मानक वेतन और रोजगार के बाद सतत रोजगार-संबंधी मार्ग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, प्रधान सचिव राजीव रंजन, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक डॉ. चंद्रशेखर खरे, निगरानी एवं समन्वय की विशेष सचिव डॉ. प्रियंका सोनी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारी वर्ग को निर्देश दिए गए कि वे अगले कुछ हफ्तों में जिला स्तर पर जॉब फेयर के कैरिग्राम (कार्यान्वयन योजना), लक्षित उद्योग-तलाक (sector-wise) सूचि और मासिक रिपोर्टिंग तंत्र प्रस्तुत करें।

सरकार ने बताया कि NAPS के तहत अप्रेंटिसशिप और उद्योगों के समन्वय को बढ़ाने से न सिर्फ़ युवा कार्यबल को कौशल मिलेगा, बल्कि स्थानीय उद्योगों के लिए भी योग्य मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। कार्यक्रम की सफलता के लिए विभागों को प्रगतिशील निगरानी, आकस्मिक आंकलन और फीडबैक मैकेनिज़्म लागू करने के निर्देश दिये गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक अगले चरण में हर जिले में प्राथमिक तौर पर उद्योग-डोमेन के हिसाब से पायलट जॉब फेयर आयोजित किये जाएँगे, जिनमें स्थानीय एमएसएमई, विनिर्माण इकाइयां, सेवा क्षेत्र और कौशल विकास संस्थान भाग लेंगे। इन फेयरों में अप्रेंटिसशिप पदों के साथ-साथ प्रशिक्षुता-आधारित सीधी भर्ती और इंडस्ट्री-इंटर्नशिप के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

सीएम की समीक्षा का लक्ष्य स्पष्ट है: न केवल स्कीम के क्रियान्वयन को बेहतर बनाना, बल्कि मासिक रूप से रोजगार सृजन के ठोस नतीजे दिखाना ताकि युवाओं के लिए रोज़गार पथ सहज और परिणामक हों।