चंडीगढ़। हरियाणा में धान की कटाई शुरू होने के साथ ही पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने निगरानी और कार्रवाई का नया खाका तैयार किया है। अब जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष ‘पराली संरक्षण बल’ तैनात किया जाएगा। इस टीम में पुलिस के साथ कृषि, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, जो खेतों में आग की घटनाओं पर नजर रखने के साथ मौके पर कार्रवाई भी करेंगे।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पराली प्रबंधन और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुपालन को लेकर राज्य की तैयारियों पर चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस बार निगरानी व्यवस्था को जमीन पर और मजबूत करने के साथ तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार की नजर खासतौर पर शाम ढलने के बाद पराली जलाने की कोशिशों पर है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ मामलों में उपग्रह निगरानी से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद खेतों में आग लगाने का प्रयास किया जाता है। इसे रोकने के लिए देर शाम और रात के समय गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा चिन्हित गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए भी खेतों की निगरानी की जाएगी।

पराली जलाने की घटना सत्यापित होने पर संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई के कई स्तर तय किए गए हैं। मामले में एफआईआर दर्ज करने, चालान करने और भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ करने का प्रावधान रहेगा। इसके साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की निर्धारित राशि भी वसूली जाएगी। यानी खेत में आग लगाने की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई केवल मौके तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसका रिकॉर्ड भूमि दस्तावेजों में भी दर्ज होगा।

सरकार ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए मशीनरी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई है। फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग पर किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा ऐसी मशीनरी खरीदने के लिए सब्सिडी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसान पराली को खेत में ही प्रबंधित कर सकें या उसे उपयोगी तरीके से बाहर निकाल सकें।

धान की कटाई के समय मशीनरी की कमी न हो, इसके लिए जिलों के बीच मशीनों की आवाजाही की योजना तैयार की गई है। बेलर, रेकर्स और अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी को फसल कटाई के कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जाएगा। सितंबर में यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में कटाई शुरू होने के बाद अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद जैसे जिलों में गतिविधियां बढ़ने की संभावना को देखते हुए मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

गांव स्तर पर निगरानी के लिए 8,134 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। राज्य के करीब 5,600 गांवों में 6,21,285 पंजीकृत धान उत्पादक किसान हैं और लगभग 34.1 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती होती है। इनमें से 6,04,314 किसानों को नोडल अधिकारियों के माध्यम से कवर किया जा चुका है, जबकि 16,971 किसानों तक पहुंचना अभी बाकी है।

नोडल अधिकारियों को मोबाइल एप के जरिए खेतों में सक्रिय आग की जानकारी दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही प्रबंधित कर रहे हैं, उसे बाहर निकाल रहे हैं या चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एप पर आग की सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र का पराली संरक्षण बल सक्रिय होगा और मौके पर कार्रवाई करेगा।

सामान्य गांवों में एक नोडल अधिकारी को अधिकतम 100 किसानों और हॉटस्पॉट गांवों में अधिकतम 50 किसानों से जोड़ा गया है। वहीं ड्रोन निगरानी के लिए उपायुक्तों को पहले से संवेदनशील गांवों और स्थानों की पहचान करने को कहा गया है। इस तरह सरकार ने इस बार पराली प्रबंधन में मैदानी निगरानी, रात की गश्त और ड्रोन तकनीक—तीनों को एक साथ जोड़ने की तैयारी की है।