हरियाणा में समय पर सरकारी सेवाएं न देने वाले 47 IAS और 4 IPS सहित 365 अधिकारियों व कर्मचारियों पर सेवा का अधिकार आयोग ने शिकंजा कसा है। लापरवाही बरतने के आरोप में इन सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी गई है।
चंडीगढ़। हरियाणा में जनता के सरकारी कामों में ढिलाई बरतने वाले अफसरों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हरियाणा के सेवा का अधिकार आयोग (राइट टू सर्विस कमीशन) ने समय पर सेवाएं उपलब्ध न कराने के आरोप में 47 IAS और 4 IPS अधिकारियों सहित कुल 365 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने साफ किया है कि जनता के प्रति जवाबदेही में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बड़ी कार्रवाई से प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
अफसरों की लापरवाही पर आयोग सख्त
आयोग ने पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान सात IAS अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार को कड़ी कार्रवाई की सिफारिश भेजी है। इन वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए अपीलेट अथॉरिटी के रूप में अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। इसके अतिरिक्त, आयोग ने 48 अन्य IAS और चार IPS अधिकारियों को भी काम में लापरवाही का दोषी पाया है, जिसके बाद उनके नाम के साथ सख्त चेतावनी और एडवाइजरी जारी कर दी गई है।
वार्षिक रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त (रिटायर्ड IAS) टीसी गुप्ता ने शुक्रवार को साल 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की। आयोग की जांच में कुल 365 अधिकारी और कर्मचारी दोषी मिले हैं, जिनमें 24 HCS और चार HPS अधिकारी भी शामिल हैं। इनके अलावा, अलग-अलग विभागों के CA, JE, SDO, XEN और SE स्तर के 205 अधिकारियों को भी शासकीय कार्यों में ढिलाई बरतने के लिए आयोग द्वारा लिखित चेतावनी दी गई है।
देश में हरियाणा मॉडल की पहचान
मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता के मुताबिक, हरियाणा के सेवा का अधिकार आयोग की बेहतरीन कार्यप्रणाली को अब पूरे देश में सराहा जा रहा है। चंडीगढ़, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी हरियाणा की इस ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को अपने यहां लागू करने की पहल की है। जनता की सुविधा के लिए आयोग ने 50 ऐसी पुरानी सरकारी सेवाओं को हटा दिया है जिनकी कोई उपयोगिता नहीं बची थी, जबकि किसानों और छात्रों से जुड़ी नई सेवाओं को समयबद्ध श्रेणी में जोड़ा है।

