चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने क्लर्कों को अतिरिक्त वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) देने के बाद पैदा होने वाली वेतन विसंगतियों को दूर करने का फैसला लिया है। अगर किसी कनिष्ठ क्लर्क का वेतन अपने वरिष्ठ स्टेनो-टाइपिस्ट से अधिक हो जाता है, तो संबंधित स्टेनो-टाइपिस्ट के वेतन में भी नियमानुसार संशोधन किया जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
वित्त विभाग ने प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और उपमंडल अधिकारियों से कहा है कि वेतन विसंगति दूर करने के लिए निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
30 जून के सर्कुलर के बाद पैदा हुई वेतन विसंगति
वित्त विभाग ने 30 जून के सर्कुलर के तहत क्लर्कों को अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने की अनुमति दी थी। इसे लागू करने के दौरान कुछ मामलों में कनिष्ठ क्लर्क का वेतन अपने वरिष्ठ स्टेनो-टाइपिस्ट से अधिक होने की स्थिति बन सकती थी।
इससे वरिष्ठता में आगे होने के बावजूद स्टेनो-टाइपिस्ट को कम वेतन मिलने की आशंका थी। वित्त विभाग ने इस स्थिति पर विचार करने के बाद संबंधित स्टेनो-टाइपिस्ट के वेतन में भी नियमानुसार संशोधन करने का निर्णय लिया है।
पात्रता और सेवा नियमों के आधार पर होगा संशोधन
वित्त विभाग के निर्देशों के मुताबिक, कनिष्ठ क्लर्क को अतिरिक्त इंक्रीमेंट मिलने से यदि उसका वेतन संबंधित स्टेनो-टाइपिस्ट से अधिक हो जाता है, तो स्टेनो-टाइपिस्ट का वेतन भी लागू नियमों के अनुसार संशोधित किया जाएगा।
हालांकि, वेतन वृद्धि का लाभ कर्मचारियों की पात्रता और संबंधित सेवा नियमों के अनुरूप ही मिलेगा। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
इस फैसले का उद्देश्य अतिरिक्त इंक्रीमेंट के बाद पैदा होने वाली वेतन विसंगति दूर करना और पात्र कर्मचारियों के वेतन में नियमों के मुताबिक समानता सुनिश्चित करना है।
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