रोहतक। हरियाणा के छोटे से गांव रूड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने एक बार फिर विश्व मुक्केबाजी में भारत का परचम लहराया है। अपनी मेहनत, संघर्ष और दमदार प्रदर्शन के दम पर मीनाक्षी ने लगातार दूसरी बार दुनिया की नंबर-1 बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे हरियाणा और देश को गौरवान्वित किया है।

वर्ल्ड बॉक्सिंग फेडरेशन की हालिया रैंकिंग में 48 किलोग्राम भार वर्ग में मीनाक्षी हुड्डा को विश्व की नंबर-1 मुक्केबाज घोषित किया गया है। इससे पहले भी वह इस प्रतिष्ठित स्थान पर रह चुकी हैं और अब दोबारा शीर्ष स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

एक साल में जीते कई अंतरराष्ट्रीय पदक

मीनाक्षी ने पिछले एक वर्ष में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप और ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते, जबकि वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में रजत पदक अपने नाम किया।

उनकी सबसे बड़ी सफलता इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देखने को मिली, जहां उन्होंने फाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान की चार बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक रजत पदक विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली मीनाक्षी के पिता कृष्ण हुड्डा ऑटो चालक हैं, जबकि उनकी मां सुनीता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी के सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया।

मीनाक्षी ने वर्ष 2013 में गांव में ही कोच विजय हुड्डा के मार्गदर्शन में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। सामाजिक चुनौतियों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकीं

मीनाक्षी 2023 और 2024 में लगातार दो बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक के साथ-साथ इलरोडा कप और ब्रिक्स प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया है।