कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़।हरियाणा में चल रहे नगरीय निकाय चुनाव अब सिर्फ चेयरमैन और पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें प्रदेश की राजनीति का ‘क्वार्टर फाइनल’ माना जा रहा है। आने वाले समय में 2027 के पंचायत चुनाव (सेमी फाइनल) और फिर 2029 के विधानसभा चुनाव (फाइनल) से पहले यह मुकाबला दोनों बड़ी पार्टियों के लिए बेहद अहम हो गया है।

खास बात यह है कि ये चुनाव नायब सिंह सैनी के कार्यकाल के पहले बड़े चुनाव हैं। ऐसे में इसे उनकी लीडरशिप और सरकार की पकड़ के पहले बड़े टेस्ट के तौर पर भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो पार्टी इन निकाय चुनावों में बढ़त बनाएगी, उसे मानसिक बढ़त (Psychological Advantage – मनोवैज्ञानिक बढ़त) मिल सकती है। यही बढ़त अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

बीजेपी vs कांग्रेस: पूरा जोर क्यों?
बीजेपी (BJP – भारतीय जनता पार्टी):
पार्टी इन चुनावों में अपनी जीत की लय को बरकरार रखना चाहती है और नायब सैनी के नेतृत्व को मजबूत संदेश देना चाहती है।

कांग्रेस (Congress – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस):
कांग्रेस इन चुनावों को वापसी के मौके के रूप में देख रही है और जनता के मूड को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश में जुटी है।

ग्राउंड रिपोर्ट: माहौल कैसा है?
दोनों ही पार्टियां इस चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर नजर आ रही हैं। भले ही यह निकाय चुनाव हो, लेकिन इसे विधानसभा और लोकसभा चुनाव से कम नहीं आंका जा रहा।
0 बड़े नेता लगातार वार्ड स्तर पर मीटिंग कर रहे हैं
0 हर सीट पर बारीकी से फीडबैक लिया जा रहा है
0 प्रचार में पूरी ताकत झोंकी जा रही है।

यानी साफ है कि यह चुनाव सिर्फ लोकल बॉडी तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों की नींव तैयार कर रहा है।

क्षेत्रीय दल भी एक्टिव
इस मुकाबले में इनेलो, जेजेपी और आप जैसी पार्टियां भी अपनी जमीन तलाशने में जुटी हैं। इनके लिए यह चुनाव भविष्य की दिशा तय करने वाला मौका माना जा रहा