रोहित कश्यप, मुंगेली। जिला अस्पताल इन दिनों प्रशासनिक और वित्तीय अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। पिछले करीब एक माह से जिला अस्पताल में सिविल सर्जन का पद रिक्त होने के कारण अस्पताल के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, लेकिन वित्तीय अधिकार नहीं होने के कारण अस्पताल से जुड़े कई महत्वपूर्ण वित्तीय कामकाज प्रभावित बताए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के जिला स्वास्थ्य समिति के अंतर्गत कार्यरत 71 अधिकारी-कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। वहीं जिला अस्पताल के 104 नियमित अधिकारी-कर्मचारियों, जिसमें डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ शामिल हैं, उन्हें भी पिछले एक माह से वेतन मिलने का इंतजार है। वेतन भुगतान में देरी ने कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी कर दी है।

सिविल सर्जन नहीं, वित्तीय अधिकार नहीं और अटक गया कामकाज

जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था के संचालन में सिविल सर्जन की भूमिका अहम होती है। वर्तमान में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार तो है, लेकिन वित्तीय अधिकार नहीं होने की वजह से नियमित वित्तीय प्रक्रियाओं में अड़चन की स्थिति निर्मित हो रही है। जानकारी के मुताबिक वेतन भुगतान सहित अस्पताल के कई वित्तीय मामलों के प्रभावित होने की वजह से कर्मचारियों में भी नाराजगी की खबर है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था की गई है तो उसे प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक वित्तीय अधिकार क्यों नहीं दिए गए?

100 बिस्तर मातृत्व एवं शिशु अस्पताल की ऑपरेशन थिएटर में सीपेज

प्रशासनिक और वित्तीय समस्या के बीच अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। 100 बिस्तर वाले मातृत्व एवं शिशु अस्पताल की ऑपरेशन थिएटर में सीपेज की समस्या की ख़बर सामने आई है।ऑपरेशन थिएटर जैसी संवेदनशील जगह पर सीपेज होना अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। इसके बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाने की बात सामने आ रही है। इसके चलते फिलहाल 100 बिस्तर मातृत्व एवं शिशु अस्पताल के मरीजों के ऑपरेशन जिला अस्पताल के पुराने ऑपरेशन थिएटर में किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस उद्देश्य से नया मातृत्व एवं शिशु अस्पताल तैयार किया गया, वहां की ऑपरेशन थिएटर में आई तकनीकी समस्या का समय रहते निराकरण क्यों नहीं हो पा रहा है?

ब्लड बैंक कक्ष में भी सीपेज, फॉल सीलिंग का प्लास्टर गिरा

समस्या सिर्फ ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक कक्ष की छत का प्लास्टर भी सीपेज के कारण भरभराकर गिर गया है। जिससे बड़ा हादसा टल गया है, बड़ी अनहोनो हो सकती थी,ब्लड बैंक अस्पताल की बेहद महत्वपूर्ण इकाई है, जहां प्रतिदिन मरीजों और उनके परिजनों की जरूरत के अनुसार रक्त संबंधी सेवाएं संचालित होती हैं।
ऐसे महत्वपूर्ण कक्ष में फॉल सीलिंग का प्लास्टर गिरना अस्पताल की भवन एवं रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।साथ ही निर्माण कार्यों पर प्रश्न चिन्ह है?इसके बावजूद समस्या का दुरुस्त नहीं हो पाना चिंता का विषय है।

एक तरफ वेतन का संकट, दूसरी तरफ भवन की हालत खराब!

जिला अस्पताल की मौजूदा तस्वीर को देखा जाए तो एक तरफ अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की महत्वपूर्ण इकाइयों में सीपेज और भवन संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं। 71 जिला स्वास्थ्य समिति कर्मचारियों को दो माह का वेतन नहीं मिलना और 104 नियमित स्टाफ को एक माह से वेतन नहीं मिलना अपने आप में व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। वहीं ऑपरेशन थिएटर और ब्लड बैंक जैसी संवेदनशील जगहों पर सीपेज और फॉल सीलिंग गिरने की समस्या मरीजों की सुरक्षा एवं अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

दिग्गज नेताओं वाले जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

मुंगेली जिला राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम अरुण साव,विधायक पुन्नूलाल मोहले-धरमलाल कौशिक जैसे दिग्गज नेताओं का यह जिला है,ऐसे में जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।

सवाल यह नहीं है कि समस्या किस सरकार या किस जनप्रतिनिधि के कार्यकाल में पैदा हुई, बल्कि सवाल यह है कि जिले के सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल में कर्मचारियों को समय पर वेतन, आवश्यक वित्तीय अधिकार और मरीजों के लिए सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं आखिर कब सुनिश्चित होंगी?मुंगेली जैसे जिले में जहां एक बड़ा जरूरत मंद तबका सरकारी अस्पताल पर निर्भर है, वहां जिला अस्पताल की व्यवस्था का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल सिविल सर्जन की नियुक्ति अथवा प्रभावी वित्तीय व्यवस्था, लंबित वेतन भुगतान, ऑपरेशन थिएटर के सीपेज तथा ब्लड बैंक की छत की मरम्मत की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिला अस्पताल की बिगड़ती व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कब तक ठोस कार्रवाई करता है।

व्यवस्थागत चुनौतियां क्यों ?

जिला अस्पताल में सिविल सर्जन का पद करीब माह भर से रिक्त है। दरअसल, तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. एम.के. रॉय के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग ने किसी नए सिविल सर्जन की नियुक्ति नहीं की। इसके बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन पद का प्रभार फिलहाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा के पास है ।वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर उनके पास चालू प्रभार तो है लेकिन सिविल सर्जन के पद से जुड़े आवश्यक वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए। यही स्थिति अब जिला अस्पताल के प्रशासनिक एवं वित्तीय कामकाज में बड़ी अड़चन के रूप में सामने आ रही है।डॉ. एम.के. रॉय के सेवानिवृत्त होने के बाद नए सिविल सर्जन की नियुक्ति नहीं होना और दूसरी ओर चालू प्रभार संभालने वाले अधिकारी को वित्तीय अधिकार नहीं मिलना, दोनों परिस्थितियों ने अस्पताल की व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसका असर अब कर्मचारियों के वेतन भुगतान से लेकर अस्पताल की अन्य वित्तीय जरूरतों और व्यवस्थाओं पर भी दिखाई देने लगा है।

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