Dharm Desk – हिंदू धर्म में जब भी हम मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते हैं, दर्शन के बाद भगवान की परिक्रमा करना हमारी पूजा का एक अभिन्न हिस्सा होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम मूर्तियों के चारों ओर क्यों घूमते हैं? शास्त्रों, विशेषकर ‘स्कंद पुराण’ में इसका बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक अर्थ छिपा है. परिक्रमा का सीधा सा अर्थ है ईश्वर ही हमारे जीवन का एकमात्र केंद्र बिंदु हैं. जब हम श्रद्धा से भरे हुए भगवान के चारों ओर कदम बढ़ाते हैं, तो हम ब्रह्मांड की उस सर्वोच्च शक्ति के प्रति अपना पूर्ण समर्पण व्यक्त कर रहे होते है. मान्यता है कि सही विधि से कि गई परिक्रमा आपकी सामान्य पूजा के पुण्य को कई गुना तक बढ़ा देती है.

किस देवता की कितनी परिक्रमा है शुभ होगी

अक्सर अज्ञानतावश हम दूसरों को देख कर परिक्रमा कर लेते हैं, लेकिन हमारी प्राचीन सनातन परंपराओं में हर देवी-देवता के लिए परिक्रमा की एक विशेष संख्या निर्धारित की गई है. आइए जानते हैं कि शास्त्र इस बारे में क्या कहते है…

  1. विघ्नहर्ता श्री गणेश : किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश की तीन या पांच बार परिक्रमा करने का विधान है. ऐसा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटें दूर होती हैं और कार्यों में निर्विघ्न सफलता प्राप्त होती है.
  2. भगवान विष्णु : श्री हरि विष्णु और उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए. यह संख्या जीवन में सुख, अटूट ऐश्वर्य, शांति और धर्म के मार्ग पर निरंतर उन्नति का आशीर्वाद दिलाती है.
  3. माँ दुर्गा : देवी भवानी की आराधना में एक या नौ परिक्रमा का नियम बताया गया है. जो भक्त यह परिक्रमा करता है. उसके भीतर अदम्य साहस, ऊर्जा और जीवन से लड़ने का गजब का आत्म विश्वास पैदा होता है.
  4. देव सूर्यनारायण : यदि आप स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो सूर्यदेव की सात परिक्रमाएं जरूर करें. यह आपके भीतर नई स्फूर्ति, तेज और सकारात्मकता का संचार करती है.
  5. शिवलिंग (हमेशा आधी परिक्रमा): शिवजी की पूजा के नियम थोड़े अलग और सख्त हैं. शिव भक्तों को ध्यान रखना चाहिए कि शिवलिंग की कभी भी पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती. शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की ‘जलधारी’ (सोमसूत्र) को लांघना घोर वर्जित है. इसलिए हमेशा आधी परिक्रमा करके वापस अपनी जगह पर लौट आना चाहिए.

क्या है परिक्रमा की सही दिशा और नियम

वास्तु और ज्योतिष के अनुसार परिक्रमा हमेशा ‘दक्षिणावर्त’ दिशा में ही करनी चाहिए. यह ब्रह्मांड में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा के प्राकृतिक प्रवाह को दर्शाती है. उल्टी दिशा में घूमना धार्मिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित माना गया है.

भूलकर भी न करें ये गलतियां

आज के डिजिटल युग में बहुत से लोग परिक्रमा करते समय भी मोबाइल पर लगे रहते हैं. आपस में गपशप करते हैं. यह आपकी पूजा को खंडित कर सकता है. परिक्रमा हमेशा शांत मन से, धीमी और सहज गति से करनी चाहिए. इस दौरान आपका ध्यान और होंठ केवल अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप कर रहे हों.