वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। सूरजपुर जिले में गर्भवती युवती की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी हुए आरोपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सुनवाई के लिए अनुमति दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि डीएनए और फारेंसिक साक्ष्यों के मद्देनजर ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले की अपीलीय स्तर पर गहन जांच जरूरी है।
पूरा मामला सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के तारा चौकी का है। 2 दिसंबर 2023 को जंगल में एक अज्ञात महिला का अधजला शव मिला था। पुलिस ने जांच में शव की पहचान के बाद मृतका के प्रेम संबंध के आधार पर अतवार सिंह मरावी को गिरफ्तार किया।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी युवक युवती को जंगल ले गया। विवाह को लेकर विवाद होने पर दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को पेट्रोल डालकर जला दिया। पोस्टमार्टम में मृतका के गर्भवती होने का पता चला। एफएसएल जांच में मौके पर मानव शुक्राणु मिले। वहीं डीएनए रिपोर्ट में गर्भस्थ भ्रूण का डीएनए आरोपित के डीएनए से मेल खाया, जिससे वह भ्रूण का जैविक पिता पाया गया।
राज्य सरकार ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने मौखिक, चिकित्सीय और वैज्ञानिक साक्ष्यों की सही तरीके से सराहना नहीं की और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला को नजरअंदाज करते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दे दिया।
मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य हैं, जिनकी अपीलीय स्तर पर विस्तृत जांच आवश्यक है। इसलिए यह मामला मेरिट पर सुनवाई योग्य है। अदालत ने आरोपी के विरुद्ध 5,000 के जमानती वारंट जारी करते हुए 28 जुलाई 2026 को उपस्थित होने का आदेश दिया है, साथ ही ट्रायल कोर्ट का रिकार्ड तलब किया है।
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