चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने जमानत के मामलों में पारदर्शिता को लेकर सख्त कहा कि अदालत से राहत मांगने वाला हर याची जरूरी तथ्यों का पूरा खुलासा करने के लिए बाध्य है। इसमें पहले से दायर और खारिज जमानत याचिकाएं भी शामिल हैं। कोर्ट ने साफ किया कि न्याय की प्रक्रिया ईमानदारी पर टिकी है और इसमें जानकारी छिपाने की गुंजाइश नहीं है।
जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि डिजिटल युग में केस से जुड़ी जानकारी आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध है। ऐसे में वकील या याची द्वारा जानकारी नहीं थी, का तर्क पेश करना पेशेवर लापरवाही के दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के समक्ष क्लीन हैंड्स के साथ आना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य शर्त है।
याची का यह दायित्व है कि वह अपनी याचिका में पहले जमानत लेने के प्रयासों और उन पर आए फैसलों का स्पष्ट उल्लेख करे। क्योंकि अगली जमानत याचिका पर विचार करते समय अदालत यह देखती है कि पिछली याचिका के बाद परिस्थितियों में क्या बदलाव आया है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि अब कोर्ट की साइट और सार्वजनिक डोमेन में केस से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है। मामले में 22 अक्टूबर, 2025 को फरीदकोट सिटी थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। याची हिरासत में था। जांच पूरी हो चुकी है और 19 जनवरी को चालान पेश हो चुका, पर 21 गवाहों में से एक का बयान दर्ज नहीं हुआ। ट्रायल में देरी को देखते हुए कोर्ट ने जमानत मंजूर की, पर पूर्व जमानत याचिका छिपाने पर 10 हजार जुर्माना लगाया।
- पंजाब के बटाला पुलिस चौकी में जोरदार धमाका, बब्बर खालसा इंटरनेशनल ने ली जिम्मेदारी
- Bankipur Bypoll: बीजेपी के ‘अभेद किले’ में PK की एंट्री, नीरज सिन्हा 11,621 वोटों से पीछे
- पोस्टमार्टम रूम में शव पर रेंगती मिलीं चीटियां: डॉक्टर के इंतजार में 10 घंटे तक जमीन पर पड़ा रहा, परिजनों का हंगामा
- पैसे दो, नंबर बढ़वा देंगे… अगर ऐसा कॉल आए तो हो जाएं सावधान! UP Board ने जारी किया अलर्ट
- कांवड़ यात्रा को लेकर कैथल पुलिस हाई अलर्ट, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम और कड़े सुरक्षा इंतजाम


