हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्यप्रदेश में सगोत्र विवाह को लेकर सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। इंदौर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़वानी, धार और खरगोन जिलों में सगोत्र विवाह करने वाले दंपतियों और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया। इतना ही नहीं, विवाह में शामिल लोगों पर आर्थिक दंड लगाए जाने और सामाजिक दबाव बनाने जैसे कदम भी उठाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि याचिकाकर्ताओं या उनके परिवार को किसी प्रकार की धमकी, उत्पीड़न या सुरक्षा संबंधी खतरा महसूस होता है तो पुलिस तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराए। साथ ही प्रशासन को याचिकाकर्ताओं और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बालिगों के विवाह में हस्तक्षेप नहीं कर सकता कोई संगठन
याचिकाकर्ताओं ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ‘शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ’ फैसले सहित अन्य न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि दो बालिग व्यक्तियों के वैध विवाह में किसी भी जातीय संगठन, खाप पंचायत या निजी संस्था को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। न ही ऐसे संगठन सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दंड या समानांतर न्याय व्यवस्था लागू कर सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि समाज के कुछ पदाधिकारियों द्वारा सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड जैसे फैसले लेकर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। इसी आधार पर इन फैसलों को अदालत में चुनौती दी गई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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