उत्तम कुमार, मुजफ्फरपुर। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक हुमायूं कबीर की रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान गिरफ्तारी पर प्रसिद्ध मुस्लिम स्कॉलर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता, चाहे वह कितना भी बड़ा राजनीतिक नेता या विधायक क्यों न हो।

मतदान के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

हाजी परवेज सिद्दीकी ने कहा कि, 6 अक्टूबर को रेजीनगर उपचुनाव के दिन हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच हुए टकराव तथा उसके बाद हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और चुनावी माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मतदान के दौरान पुलिस के साथ तीखी बहस के बाद हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि, राजनीतिक विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन को चुनौती देना, तनाव पैदा करना या लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाना किसी भी हालत में उचित नहीं है। कानून का पालन हर व्यक्ति के लिए समान होना चाहिए।

‘बाबरी मस्जिद मुद्दे और पुराने मामलों का भी हो हिसाब’

हाजी परवेज सिद्दीकी ने कहा कि, हुमायूं कबीर से जुड़े विवादों को केवल आज की गिरफ्तारी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, वर्ष 2026 में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण के मुद्दे को लेकर हुमायूं कबीर के खिलाफ शिकायतें और FIR का मामला सामने आया था।

उन्होंने कहा कि, बाबरी मस्जिद के नाम पर मुर्शिदाबाद में जिस तरह का राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की गई, उस समय मैंने स्वयं हुमायूं कबीर के खिलाफ तीन अलग-अलग FIR दर्ज कराई थीं। मेरा उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि कानून-व्यवस्था और बंगाल के सामाजिक सौहार्द की रक्षा करना था।

हाजी परवेज सिद्दीकी ने आगे कहा कि, बाबरी मस्जिद के नाम पर राजनीति करके धार्मिक भावनाओं को भड़काने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द से है और किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसे नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाना चाहिए।

‘1000 करोड़ के कथित मामले की भी हो निष्पक्ष जांच’

हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि, बाबरी मस्जिद विवाद के साथ-साथ हुमायूं कबीर से जुड़े कथित ₹1000 करोड़ के मामले को लेकर भी उनके द्वारा FIR दर्ज कराई गई थी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में सामने आए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी निष्पक्ष जांच की जाए।

उन्होंने कहा कि, मैंने ₹1000 करोड़ से जुड़े कथित मामले को भी गंभीरता से उठाया था और इसी क्रम में FIR दर्ज कराने की कार्रवाई की गई थी। अब मेरा प्रशासन से सीधा सवाल है कि उन मामलों में जांच कहां तक पहुंची? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते तो उसका तथ्य भी सार्वजनिक होना चाहिए। न्याय का आधार निष्पक्ष जांच और सच्चाई होनी चाहिए।

‘अपने निष्कर्ष तक पहुंचे जांच’

हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि, आज हुई गिरफ्तारी के साथ पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा कानून के मुताबिक जांच के दायरे में आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, मैं किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रहा हूं। मेरी मांग बिल्कुल स्पष्ट है। बाबरी मस्जिद से जुड़े मामले हों, कथित 1,000 करोड़ का मामला हो या आज रेजीनगर में हुई घटना, हर मामले की निष्पक्ष जांच हो। यदि सक्षम न्यायालय में आरोप सिद्ध होते हैं तो कानून के अनुसार सजा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि, किसी राजनीतिक पद पर होना कानूनी जवाबदेही से छूट नहीं देता। यदि एक आम नागरिक के खिलाफ कानून लागू होता है, तो विधायक और राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भी वही कानून लागू होना चाहिए।

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