पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला नगर निगम से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) ने इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए सीनियर आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा मामला नगर निगम के खजाने से करीब 79.46 करोड़ रुपये की हेराफेरी से जुड़ा हुआ है। जिस समय यह कथित घोटाला हुआ, उस दौरान राम कुमार सिंह पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर यानी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का जिम्मा संभाल रहे थे।

सरकारी खातों से फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर हुआ पैसा

जांच एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला इस साल फरवरी के महीने में पकड़े गए बैंक फ्रॉड (Bank Fraud) का हिस्सा है। उस समय कुछ चालाक लोगों ने मिलीभगत करके कई सरकारी विभागों के खाते निजी बैंकों में खुलवाए थे। इसके बाद उन खातों में जमा सरकारी पैसा चुपके से कागजी और फर्जी कंपनियों (Shell Companies) के बैंक खातों में भेज दिया गया। ऐसी कंपनियां सिर्फ कागजों पर चलती हैं और इनका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने या हेराफेरी के लिए किया जाता है।

अधिकारियों की मिलीभगत से छिपाया गया फर्जी लेनदेन

जांच में सामने आया है कि पंचकूला नगर निगम का यह खाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा में खोला गया था। खाता खोलते समय कागजातों में जानबूझकर गलत और भ्रामक जानकारियां भरी गईं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बाद में जब इस खाते से करोड़ों रुपये इधर-उधर किए जाएं, तो किसी को आसानी से कानों-कान खबर न हो और फर्जी लेनदेन को पूरी तरह छिपाया जा सके। मामला खुलने के बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए 9 अप्रैल 2026 को ही आरके सिंह को नौकरी से सस्पेंड (Suspend) कर दिया था।

सस्पेंशन से पहले इन बड़े पदों पर थे तैनात

सस्पेंड होने से पहले राम कुमार सिंह सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव जैसे रसूखदार पद पर काम कर रहे थे। इसके साथ ही उनके पास पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भी जिम्मेदारी थी। इससे पहले वे जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम के मुखिया रहे। सीबीआई की इस बड़ी कार्रवाई के बाद से हरियाणा के प्रशासनिक हलकों और पूरी ब्यूरोक्रेसी (Haryana Bureaucracy) में हड़कंप मच गया है। एजेंसी अब इस बात का पता लगा रही है कि इस खेल में और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं।