पटना। बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में चिकित्सा सेवाओं का दायरा आज से और अधिक व्यापक होने जा रहा है। गुरुवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार संस्थान में पांच नई और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का औपचारिक उद्घाटन करने जा रहे हैं। इन सुविधाओं के शुरू होने से न केवल गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता में भारी इजाफा होगा, बल्कि बिचौलियों और दलालों के तंत्र पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
दलालों की हरकतों पर लगेगा विराम
अस्पताल परिसर में अक्सर देखने को मिलता है कि भोले-भाले मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स या अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इस तरह के अवैध धंधों पर नकेल कसने और मरीजों की शिकायतों का तुरंत समाधान करने के लिए ओपीडी कॉम्प्लेक्स में एक हाई-टेक ‘कमांड सेंटर’ की शुरुआत की जा रही है।
विशेष नोट: इस कमांड सेंटर की मदद से अब मरीज या उनके तीमारदार इलाज, मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया और आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। इसके शुरू होने से मरीजों को विभिन्न विभागों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी।
डायलिसिस के लिए अब नहीं करना होगा लंबा इंतजार
राज्यभर से किडनी की गंभीर समस्या से जूझकर IGIMS पहुंचने वाले मरीजों के लिए यह दिन एक बड़ी राहत लेकर आया है।
- पुरानी स्थिति: अब तक संस्थान में केवल 12 हीमोडायलिसिस मशीनें उपलब्ध थीं, जिनकी मदद से रोजाना औसतन सिर्फ 20 मरीजों का ही डायलिसिस हो पाता था। इस वजह से मरीजों को लंबी वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता था।
- नई व्यवस्था: अब इसमें 20 नई डायलिसिस यूनिट्स और जुड़ गई हैं। इसके बाद एक ही दिन में काफी अधिक संख्या में मरीजों को डायलिसिस के लिए स्लॉट मिल सकेगा। खासकर उन मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिन्हें हफ्ते में दो से तीन बार नियमित रूप से डायलिसिस करानी पड़ती है।
- मॉड्यूलर ओटी और क्रिटिकल आईसीयू से घटेगी वेटिंग लिस्ट
- गंभीर बीमारियों के इलाज और सर्जरी के क्षेत्र में भी IGIMS एक नया मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। न्यूरोसर्जरी से जुड़े मामलों में मरीजों को अभी तक दो से तीन महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था।
- मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर कॉम्प्लेक्स: इसके पूरी क्षमता के साथ संचालित होने पर एक ही समय में कई बड़े ऑपरेशन संभव हो सकेंगे। इस नियंत्रित और अत्याधुनिक परिसर में सर्जरी की तैयारी से लेकर रिकवरी तक की सभी व्यवस्थाएं एक ही छत के नीचे होंगी, जिससे संक्रमण (इंफेक्शन) का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
- क्रिटिकल केयर मेडिसिन आईसीयू: इस नए आईसीयू के शुरू होने से वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले गंभीर मरीजों को चौबीसों घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख मिलेगी। इसके साथ ही, ऑपरेशन के बाद की जाने वाली पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की व्यवस्था भी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
हर्बल गार्डन से संवरेगा प्राकृतिक परिवेश
चिकित्सा और मरीजों की मानसिक शांति को ध्यान में रखते हुए संस्थान परिसर में एक नए ‘हर्बल गार्डन’ का भी उद्घाटन किया जा रहा है। यह औषधीय पौधों से सुसज्जित बगीचा न केवल अस्पताल के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाएगा, बल्कि स्वच्छ और सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने में भी सहायक सिद्ध होगा। कुल मिलाकर, इन पांचों सुविधाओं के धरातल पर उतरने से मरीजों को एक ही परिसर में विश्वस्तरीय और सुलभ चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।


