​Automobile Desk – सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर कटने वाला ई-चालान अक्सर लोग हल्का समझकर टाल देते हैं। ज्यादातर वाहन चालकों में यह गलतफहमी होती है कि कुछ महीनों या सालों में पेंडिंग चालान का रिकॉर्ड अपने आप सिस्टम से हट जाएगा। हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। चालान का भुगतान न करने पर यह समय के साथ खत्म नहीं होता, बल्कि एक गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मुसीबत का रूप ले लेता है।

​जब किसी गाड़ी का चालान कटता है, तो वह सीधे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर और मालिक के ड्राइविंग लाइसेंस से लिंक हो जाता है। तय समयसीमा के भीतर जुर्माना न भरने की स्थिति में यातायात विभाग संबंधित मामले को ट्रैफिक मजिस्ट्रेट कोर्ट (Virtual या Physical Court) में ट्रांसफर कर देता है। इसके बाद वाहन मालिक के पंजीकृत पते या मोबाइल नंबर पर कोर्ट में पेश होने का कानूनी समन भेजा जाता है। यदि चालक नोटिस मिलने के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं होता या सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने की याचिका दायर नहीं करता, तो कोर्ट एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई करते हुए दंडात्मक आदेश जारी कर सकती है।

​लंबे समय तक चालान लंबित रहने पर वाहन और उसके दस्तावेज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हो सकती हैं। परिवहन विभाग का केंद्रीय डेटाबेस ऐसे वाहनों को ‘ब्लैकलिस्ट’ या ‘फ्लैग’ कर देता है। इसका सीधा असर गाड़ियों के रोजमर्रा के कागजी कामों पर पड़ता है:

​RC और NOC में रुकावट: वाहन की आरसी (Registration Certificate) का नवीनीकरण, एड्रेस चेंज या दूसरे राज्य के लिए एनओसी (NOC) लेना असंभव हो जाता है।

​ड्राइविंग लाइसेंस पर खतरा: खतरनाक ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग या शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसे गंभीर उल्लंघनों के मामलों में अदालत लाइसेंस को निलंबित या हमेशा के लिए रद्द करने की सिफारिश कर सकती है।

​सड़क पर गाड़ी जब्त होना: चेकिंग के दौरान यदि पुलिस अधिकारी के डिवाइस पर भारी-भरकम पेंडिंग चालान की हिस्ट्री दिखती है, तो गाड़ी को मौके पर ही सीज (जब्त) किया जा सकता है।

​पुरानी गाड़ी बेचते समय भी बकाया चालान बड़ा रोड़ा बनते हैं। कोई भी नया खरीदार या यूज्ड कार प्लेटफॉर्म (जैसे Cars24, Spinny आदि) गाड़ी का सौदा फाइनल करने से पहले ‘वाहन’ पोर्टल पर पेंडिंग चालान का रिकॉर्ड जरूर चेक करता है।

बकाया राशि मिलने पर या तो खरीदार गाड़ी की कीमत में भारी कटौती की मांग करता है या फिर सौदा रद्द कर देता है। इसके अलावा, कई इंश्योरेंस कंपनियां भी अब क्लेम सेटलमेंट या पॉलिसी रिन्यूअल के वक्त गाड़ी के ट्रैफिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखने लगी हैं।

​इस तरह की कानूनी पचड़ों से बचने के लिए समय-समय पर परिवहन विभाग की आधिकारिक ई-चालान वेबसाइट या ‘एम-परिवहन’ (mParivahan) ऐप पर जाकर अपने वाहन का स्टेटस चेक करते रहना चाहिए। यदि चालान साधारण स्तर पर है, तो उसे ऑनलाइन ही तुरंत भरा जा सकता है। वहीं अगर मामला वर्चुअल कोर्ट या नियमित अदालत में ट्रांसफर हो चुका है, तो पोर्टल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित जुर्माना जमा करके या कोर्ट की प्रक्रिया पूरी करके मामले को तुरंत बंद करवा लेना चाहिए।