IIT Bombay में बी.टेक सेकेंड ईयर के 22 वर्षीय छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत ने पूरे कॉलेज में उथल-पुथल मचा कर रख दिया है. भारी छात्र आक्रोश, कैंडल मार्च और देर रात तक चले विरोध प्रदर्शन के बीच इस मामले में दो सबसे बड़े अपडेट हुआ. पहला, यह कि जांच का जिम्मा अब मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गयी है, और दूसरा यह है कि छात्रों के भारी दबाव के बाद आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के 18 सूत्रीय मांग पत्र पर देर रात हस्ताक्षर कर दिए हैं.

IIT बॉम्बे में स्टूडेंट साहिल रविंद्र वाकोडे की आत्महत्या के मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डल्ला पर FIR दर्ज की गई है. इस बार मामला एससी-एसटी ऐक्ट में दर्ज किया गया है.

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले साहिल वाकोडे के पिता की लिखित शिकायत के बाद पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला समेत अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया. परिजनों और साथी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान ChatGPT का इस्तेमाल करने के संदेह पर प्रोफेसर द्वारा सस्पेंशन की धमकी, अत्यधिक दबाव और जातिगत भेदभाव किया गया.

शिकायत में तो आरोप यह भी लगाया गया है कि डायरेक्टर के निर्देश पर साहिल का उत्पीड़न किया गया. इसे लेकर तीन दिन तक प्रदर्शन हुए. इसके बाद आईआईटी-बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे ने 18 सूत्री समझौते पर साइन किया है. इस समझौते में छात्रों की कई मांगें मान ली गई हैं.

रविवार देर रात करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के 18 सूत्रीय मांग पत्र को स्वीकार करते हुए हस्ताक्षर किए. 18 सूत्रीय मांग पत्र निदेशक का इस्तीफा भी शामिल है. 

हालांकि, IIT बॉम्बे एडमिनिस्ट्रेशन और फैकल्टी फोरम ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है. प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है. वह साहिल वाकोडे की मौत से कुछ समय पहले हुई उनकी परीक्षा में पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद थे. हालांकि, साहिल के पर्यवेक्षक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही की जाएगी. 

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